मंसूर हादी को सत्ता से किसने हटाया था?
21 सितंबर 2014 को यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन और यमन की तत्कालीन अब्दो रब्बे मंसूर हादी की सरकार के मध्य समझौता हुए 9 साल का समय बीत गया परंतु इस समय यमन में हालात और परिस्थितियां पूरी तरह बदल गयी हैं।
हालिया एक दशक के अंदर यमन में बहुत उतार- चढ़ाव आये इस प्रकार से कि वर्ष 2011 की तुलना में इस समय यमन की स्थिति बहुत बदल गयी है। यमन के लोगों ने 2011 में अब्दुल्लाह सालेह की सरकार को खत्म करने के लिए आंदोलन किया और अंत में वे अब्दुल्लाह सालेह की सरकार को खत्म करने में कामयाब हो गये।
फरवरी 2011 में यमन में एक दिखावटी चुनाव हुआ जिसमें यमन के लोगों ने भाग लिया और एकमात्र प्रत्याशी मंसूर हादी को राष्ट्रपति के रूप में चुन लिया परंतु वर्ष सितंबर 2014 में मंसूर हादी की सरकार के खिलाफ भी आंदोलन किया और उसी साल यानी 21 सितंबर 2014 को मंसूर हादी की सरकार का अंत हो गया और यमनी जनांदोलन कामयाब हो गया परंतु मंसूर हादी ने गैर कानूनी तरीके से अपनी सरकार की कार्यअवधि में दो वर्ष की वृद्धि करा ली और विरोधियों के प्रतिनिधि के रूप में यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन से संधि कर ली।
इसके बावजूद मंसूर हादी अंसारुल्लाह के सत्ता में शामिल होने से राज़ी नहीं थे और 2015 के आरंभ में वह सऊदी अरब भाग गये और यमन पर सऊदी अरब के हमले की भूमि प्रशस्त कर दी। मंसूर हादी और रियाज़ सरकार का विचार यह था कि मात्र कुछ ही दिनों के भीतर अंसारुल्लाह को सत्ता से बेदखल करके दोबारा सत्ता में लौट आयेंगे परंतु 21 सितंबर 2014 को समझौता हुए लगभग 9 साल का समय बीत गया और मंसूर हादी और रियाज़ के लक्ष्य न केवल पूरे नहीं हुए बल्कि यमन की स्थिति पूरी तरह परिवर्तित हो गयी।
पहली बात यही रही कि 21 सितंबर के समझौते के बाद सत्ता में मंसूर हादी का कोई स्थान नहीं रहा और खुद सऊदी अरब ने उन्हें यमन की सत्ता से हटा दिया यहां तक कि मंसूर हादी इस समय यमन में भी नहीं हैं।
दूसरा अंतर यह है कि अंसारुल्लाह और उसके घटकों ने सना में एक सरकार का गठन किया जो इस समय यमन का संचालन कर रही है। वास्तव में मंसूर हादी और सऊदी अरब न केवल अंसारुल्लाह को सत्ता से हटाने में कामयाब नहीं हो सके बल्कि अंसारुल्लाह ने सना में एक एसी सरकार का गठन कर लिया जिसने शांति व सुरक्षा भी स्थापित कर लिया है।
सारांश यह कि यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने अमेरिका और दूसरे देशों पर निर्भर हुए बिना एक स्वतंत्र सरकार का गठन कर लिया है और विभिन्न विशेषकर सैनिक क्षेत्रों में उसने ध्यान योग्य प्रगति कर ली है इस प्रकार से कि आठ वर्षों से अधिक समय से यमनी जनता के खिलाफ जारी युद्ध में सऊदी अरब अपने दृष्टिगत लक्ष्यों को प्राप्त न कर सका जबकि उसे अमेरिका सहित दूसरे देशों व शक्तियों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। MM
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