नहीं रुक पा रहा है फ़िलिस्तीनियों का प्रतिरोध
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यहूदी त्योहारों के बहाने मस्जिदुल अक़सा के अनादर को जारी रखते हुए ज़ायोनी कालोनीवासी अवैध ढंग से इस पवित्र स्थल में प्रविष्ट हुए। 
(last modified 2023-10-02T05:56:12+00:00 )
Oct ०२, २०२३ ११:२६ Asia/Kolkata

यहूदी त्योहारों के बहाने मस्जिदुल अक़सा के अनादर को जारी रखते हुए ज़ायोनी कालोनीवासी अवैध ढंग से इस पवित्र स्थल में प्रविष्ट हुए। 

मस्जिदुल अक़सा पहुंचकर उन्होंने उकसावे वाली कार्यवाहियां शुरू कर दीं।  दक्षिणपंथी ज़ायोनी कोलीनी वासियों ने मस्जिद के प्रवेश द्वार पर पहुंचकर नांचना-गाना शुरू कर दिया। 

इससे पहले कुछ अन्य अतिवादी ज़ायोनी कालोनी वासियों ने अपने त्योहारों के दौरान मस्जिदुल अक़सा पर हमला करने के लिए लोगों को बुलवाया था।  उनके इस काम पर फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता गुटों की ओर से तीखी प्रतिक्रया सामने आई।  इसी प्रतिक्रिया के अन्तर्गत प्रतिरोधकर्ता फ़िलिस्तीनियों ने 24 घंटों के दौरान ज़ायोनियों के विरुद्ध 14 हमले किये। 

इसी बीच ग़ज्ज़ा पट्टी के प्रतिरोधकर्ता फ़िलिस्तीनियों ने चेतावनी दी है कि पैग़म्बरे इस्लाम की मेराज के कारण मस्जिदुल अक़सा हमारे लिए बहुत पवित्र स्थल है।  एसे में अगर इसके विरुद्ध कोई क़दम उठाया जाता है तो ग़ज्ज़ा पट्टी पर प्रतिरोध की ज्वाला फिर से भड़क उठेगी।  फ़िलिस्तीनियों की इस चेतावनी की गंभीरता को जिस बात ने बढ़ा दिया है वह है फ़िलिस्तीनियों की रैली है जिसको, "वापसी के अधिकार" के नारे के साथ आरंभ किया जा रहा है।  यह रैली 2020 के बाद शुरू हो रही है। 

इससे पहले सन 2018 से 2020 के बीच निकाली जाने वाली इस रैली अतिवादी ज़ायोनी कोलोनी वासियों को बुरी तरह से भयभीत कर दिया था।  फ़िलिस्तीनियों ने स्वदेश वापसी के लक्ष्य को सामने रखकर यह रैली निकाली थी।  हालांकि फ़िलिस्तीनियों ने इस विरोध प्रदर्शन के लिए जानी और माली दोनो प्रकार की क़ुर्बानी दी लेकिन इस आशा के साथ कि रैली के माध्यम से उनकी स्वदेश वापसी की भूमिका प्रशस्त हो सकती है, फ़िलिस्तीनियों ने इसको अब भी जीवित रखा है। 

मार्च 2018 से लेकर सन 2020 के अंत तक रैली के दौरान ज़ायोनी सैनिकों के हाथों कम से कम 215 फ़िलिस्तीनी मारे गए।  मरने वालों में लगभग 50 फ़िलिस्तीनी बच्चे भी शामिल थे।  इन रैलियों में लगभग बीस हज़ार फ़िलिस्तीनी घायल हुए जिनमें छोटे बच्चे भी सम्मिलित हैं।  हालांकि क़तर की मध्यस्थता और ज़ायोनी शासन के ढीले पड़ जाने के बाद दो सप्ताहों तक हालात सामान्य रहे किंतु मस्जिदुल अक़सा को लेकर ज़ायोनियों की उत्तेजक कार्यवहियां, हालात को फिर से ख़राब कर सकती हैं। 

इस प्रकार की रैलियों का फिर से शुरू किया जाना, ज़ायोनियों के बीच भय फैलने का कारण बनता जा रहा है।  उनको यह डर सता रहा है कि यह रैली अन्य फिलिस्तीनी क्षेत्रों में भी फैल सकती है।  अब अगर मस्जिदुल अक़सा के बारे में ज़ायोनियों की उकसावे वाली कार्यवाहिंया जारी रहती हैं तो फिर फ़िलिस्तीनियों की रैलियों के आरंभ होने और गंभीर झड़पों की संभावना बढ़ जाएगी।

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