अमेरिकी विदेशमंत्री ने अवैध अधिकृत फिलिस्तीन पहुंचने पर क्या कहा?
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अमेरिकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जायोनी शासन के समर्थन के साथ अतिग्रहकारियों के खिलाफ हमास की कार्यवाहियों की भर्त्सना की है।
(last modified 2023-10-12T22:42:27+00:00 )
Oct १२, २०२३ १५:०४ Asia/Kolkata
  • अमेरिकी विदेशमंत्री ने अवैध अधिकृत फिलिस्तीन पहुंचने पर क्या कहा?

अमेरिकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जायोनी शासन के समर्थन के साथ अतिग्रहकारियों के खिलाफ हमास की कार्यवाहियों की भर्त्सना की है।

उन्होंने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि मैं एक यहूदी के रूप में यहां हूं। उन्होंने आज अवैध अधिकृत फिलिस्तीन पहुंचने के बाद जायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू से मुलाकात की और उसके बाद संयुक्त प्रेस कांफ्रेन्स की।

इस प्रेस कांफ्रेन्स में नेतेनयाहू ने दावा किया कि हमास ने इस्राईल के खिलाफ भयानक युद्ध आरंभ किया है और हमारे सामने कठिन दिन होंगे किन्तु शक्ति की सभ्यता विजयी होगी और अमेरिका हमारे साथ खड़ा है इसके लिए हम अमेरिका का धन्यवाद करते हैं।

इसके बाद अमेरिका के विदेशमंत्री ने कहा कि मैं केवल अमेरिका के विदेशमंत्री के नाते यहां नहीं आया हूं बल्कि एक यहूदी के रूप में आया हूं जिसके दादा मौत की डर की वजह से भाग गये, हमास ने जो किया है वह भयानक है, हमास ने जो किया है वह दाइश जैसा है। उन्होंने कहा कि इस्राईल के लिए जो मेरा संदेश है वह यह है कि हम इस्राईल के साथ रहेंगे।

इसी प्रकार ब्लिंकन ने कहा है कि इस्राईल में आपात कालीन सरकार के गठन का हम स्वागत करते हैं और हम विभिन्न हथियार इस्राईल को देंगे।

जानकार हल्कों का मानना है कि अवैध जायोनी शासन पूरी बर्बरता के साथ फिलिस्तीन के निर्दोष बच्चों और महिलाओं की हत्या कर रहा है और अमेरिका उस शासन के समर्थन का एलान कर रहा है जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कोई महत्व नहीं है। इसी प्रकार जानकार हल्के अमेरिका से यह सवाल कर रहे हैं कि अब अमेरिका का मानवाधिकार कहां चला गया? जो हथियार उसने इस्राईल को दिये हैं उससे किसकी हत्या की जायेगी?

इसी प्रकार जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका और उसकी हां में हां मिलाने वालों के मानवाधिकार की वास्तविकता से एक बार फिर नकाब हट गयी है और विश्व जनमत एक बार फिर अमेरिकी मानवाधिकार की वास्तविकता अपनी नज़रों से देख रहा है। इसी प्रकार इन जानकार हल्कों का मानना है कि मानवाधिकार का विषय उन देशों पर दबाव डालने का मात्र एक हथकंडा है जो अमेरिका और पश्चिम की साम्राज्यवादी नीति का विरोध करते हैं जबकि वास्तविकता यह है कि अमेरिका से बढ़कर किसी भी देश ने मानवाधिकारों का हनन नहीं किया है।

नोटः ये व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM

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