ग़ज़ा पहुंची राहत सामग्री, ऊंट के मुंह में ज़ीरा
राहत सामग्री ले जाने वाले 20 ट्रक, रफ़ाह क्रॉसिंग से ग़ज़ा में दाख़िल हो गए हैं, लेकिन पिछले 16 वर्षों से नाकाबंदी और पिछले 2 हफ़्तों से भंयकर हवाई हमलों और बुनियादी ज़रूरतों से वंचित 20 लाख से ज़्यादा पीड़ित ग़ज़ा वासियों के लिए यह ऊंट के मुंह में ज़ीरा भी नहीं है।
इसके बावजूद, इस्राईल ने कहा है कि मिस्र से ग़ज़ा पहुंचने वाली सहायता सामग्री में ईंधन शामिल नहीं है।
हालांकि यह एक गहरी चिंता की बात है, क्योंकि ज़ायोनी शासन ने ग़ज़ा की बिजली, पानी और गैस काट दी है, जिससे वहां अस्तपतालों में इलाज जैसी बुनियादी ज़रूरतों का अभाव है।
पानी की आपूर्ति और अस्पतालों में उपचार मशीनों को चलाने वाले जनरेटरों के लिए ईंधन की ज़रूरत है, लेकिन ज़ायोनी शासन ग़ज़ा तक ईंधन ले जाने में रुकावट खड़ी कर रहा है।
रविवार को ईंधन की समाप्ति के कारण, ग़ज़ा का अंतिम सीवाटर प्लांट भी बंद हो गया, जिससे समुद्र के पानी को पीने के लायक़ बनाया जाता था।
इस्राईल के क्रूर और बर्बर हवाई हमलों की मार झेल रहे, ग़ज़ा में ईंधन और दवाईयों की कमी के कारण कई अस्पतालों ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है।
ईंधन के अभाव के कारण, इनक्यूबेटरों में नवजात शिशुओं सहित हज़ारों मरीज़ों का जीवन जोखिम में है। डॉक्टरों का कहना है कि किडनी और कैंसर जैसे मरीज़, पहले से ही जीवन और मृत्यु के बीच फंसे हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि मैं कल रफ़ाह क्रॉसिंग पर था और मैंने वहां एक विरोधाभास देखाः दीवार के इस तरफ़ खाद्य सामग्री से भरे ट्रक थे, तो दूसरी तरफ़ ख़ाली पेट।
उन्होंने कहाः लाखों पीड़ितों के लिए यह राहत सामग्री समुद्र में एक बूंद की तरह है, ग़ज़ा को इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। msm