सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण का जायज़ा
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हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने ग़ज़ा में ज़ायोनी शासन के अपराधों और अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन के बारे में अपने भाषण में कहा कि फ़िलिस्तीनी फ़ोर्सेज़ का आप्रेशन पूरी तरह फ़िलिस्तीनी आप्रेशन था और फ़िलिस्तीनियों की उमंगों का प्रतीक था।
(last modified 2023-11-04T04:43:49+00:00 )
Nov ०४, २०२३ १०:११ Asia/Kolkata
  • सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण का जायज़ा

हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने ग़ज़ा में ज़ायोनी शासन के अपराधों और अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन के बारे में अपने भाषण में कहा कि फ़िलिस्तीनी फ़ोर्सेज़ का आप्रेशन पूरी तरह फ़िलिस्तीनी आप्रेशन था और फ़िलिस्तीनियों की उमंगों का प्रतीक था।

फ़िलिस्तीनी फ़ोर्सेज़ के आप्रेशन के बाद चार हफ़्ते का समय बीत रहा है और ज़ायोनी शासन ग़ज़ा पट्टी पर हमले कर रहा है। इन हमलों में लगभग 9 हज़ार 300 लोग शहीद और 24 हज़ार के क़रीब घायल हो चुके है। शहीदों में 70 प्रतिशत बच्चे, महिलाएं और बूढ़े हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में कहा कि अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन पूरी तरह फ़िलिस्तीनी आप्रेशन था इसमें रेज़िस्टेंस फ़्रंट की किसी अन्य फ़ोर्स का कोई रोल नहीं था। उनका कहा कि फ़ैसला और उसे अमली रूप देना यह सब कुछ फ़िलिस्तीनी रणनीतिकारों ने किया और इसे ग़ज़ा के भीतर मौजूद अन्य संगठनों से भी हमास ने छिपाया जो कि आप्रेशन को सफल बनाने के लिए बहुत सही स्ट्रैटेजी थी।

सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण का दूसरा बिंदु यह था कि 75 से जारी ज़ायोनी शासन के जघन्य अपराध इस प्रकार के आप्रेशन की बुनियादी वजह हैं। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता को ज़ुल्म और ज़्यादती सहने की आदत हो गई थी लेकिन हालिया बरसों में इस्राईल की चरमपंथी सरकार ने ग़ज़ा के हालात को और कठिन कर दिया। दूसरी तरफ़ विश्व समुदाय और क्षेत्रीय देशों ने भी उदासीनता बरती तो फ़िलिस्तीनियों को विश्व समुदाय से निराशा हो गई और उन्होंने अपनी मेहनत से अलअक़सा तूफ़ान जैसा आप्रेशन कर दिया।

तीसरी बात यह है कि ईरान के बारे में यह दुष्प्रचार यह किया जाता है कि रेज़िस्टेंस फ़्रंट के सारे संगठन ईरान को सूचित करके ही कोई कार्यवाही करते हैं मगर साबित हो गया कि एसा नहीं है कि यह संगठन अपने फ़ैसले ख़ुद करते है।

चौथा बिंदु यह है कि ज़ायोनी शासन अमरीका और यूरोपीय देशों की मदद से इस कोशिश में है कि अलअक़सा तूफ़ान से मिली शिकस्त की किसी तरह भरपाई करे लेकिन सच्चाई तो यह है कि इस आप्रेशन ने साबित कर दिया कि ज़ायोनी शासन बहुत कमज़ोर है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि जब ज़ायोनी शासन पर हमला हुआ तो वह दहल उठा, इस्राईल पर मानो बेहोशी छा गई और उसे होश में लाने और संभालने के लिए अमरीकी अधिकारी दौड़ने लगे इसी तरह यूरोपीय अधिकारी भी इस्राईल को संभालने के लिए पहुंचे। इससे पता चलता है कि इस्राईल कितना जर्जर है।

पांचवां बिंदु यह है कि ज़ायोनी शासन ग़ज़ा में नरसंहार कर रहा है इनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं हैं। इस्राईल मुहल्लों पर हमले कर रहा है मगर इसके बाद भी कोई अरब देश अब तक ग़ज़ा की जनता के लिए कोई गंभीर क़दम उठाने के लिए तैयार नहीं हुआ केवल ज़बानी बयान दिए गए हैं। अरब नेताओं को चाहिए कि ग़ज़ा पर हमले रुकवाने के लिए कोशिश करें।

सैयद हसन नसरुल्लाह का एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु यह था कि हिज़्बुल्लाह ने शुरू से ही फ़िलिस्तीनियों की मदद की और वो लड़ाई की हिस्सा है जिसकी वजह से ज़ायोनी शासन के लेबनान की सीमा के क़रीब बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए हैं। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह की तरफ़ से कार्यवाही जारी रहेगी।

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