इस्राईली मंत्री जिसने ग़ज़ा पर परमाणु बम गिराने की मांग की
इस्राईल के यरूशलेम और विरासत मामलों के मंत्री अमीचाई एलियाहू ने ग़ज़ा पट्टी पर परमाणु बम गिराने की धमकी दी है, जहां पिछले एक महीने से ज़ायोनी सेना विनाशकारी हमले कर रही है।
मंत्री ने एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान यह भी दावा किया कि ग़ज़ा में कोई आम नागरिक नहीं है, इसलिए वहां मानवीय सहायता प्रदान करना एक विफलता होगी।
एलियाहू ने कहा कि ग़ज़ा में कोई भी ग़ैर-लड़ाकू नहीं है, इसलिए वहां परमाणु बम से हमला करना एक विकल्प हो सकता है।
हालांकि इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने अपने इस चरमपंथी मंत्री को बरख़ास्त कर दिया है, लेकिन इससे यह साबित होता है कि ज़ायोनी सेना द्वारा ग़ज़ा में निर्दोष आम नागरिकों और ख़ास तौर पर बच्चों को इतने बड़े पैमाने पर मौत के घाट उतारने के पीछे यही सोच है।
ज़ायोनी मंत्री का यह कहना था कि ग़ज़ा पट्टी के लिए ज़मीन पर कोई जगह नहीं है और जो कोई भी फ़िलिस्तीनी झंडा उठाता है, उसे पृथ्वी पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।
दुनिया भर में पहले ही ग़ज़ा में इस्राईली युद्ध अपराधों की व्यापक निंदा हो रही है, लेकिन अब परमाणु हमले की धमकी के बाद यह निंदा और भी ज़्यादा व्यापक हो गई है।
यहां तक कि इस्राईल में भी इस धमकी की आलोचना हो रही है और विपक्षी नेता याइर लेपिद ने इसे एक ग़ैर-ज़िम्मेदार मंत्री की भयावह और पागलपन भरी धमकी बताया है।
एलियाहू से जब फ़िलिस्तीनियों के भाग्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहाः वे आयरलैंड या किसी रेगिस्तान में जा सकते हैं, ग़ज़ा के राक्षसों को स्वयं इसका समाधान ढूंढना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है, जब किसी इस्राईली नेता या मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की अमानवीय और भड़काऊ बात कही है। 7 अक्टूबर को अवैध अधिकृत इलाक़ों में हमास के अभूतपूर्व ऑप्रेशन के बाद अकसर ज़ायोनी नेताओं ने फ़िलिस्तीनियों को सामूहिक दंड दिए जाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया है।
फ़िलिस्तीनियों को इंसानों की शक्ल में जानवर और पशु बताने वाले एक पूर्व ज़ायोनी जनरल ने कहा है कि इस्राईली सेना को ग़ज़ा में एक अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी उत्पन्न करनी चाहिए।
ग़ज़ा पर इस्राईल के अंधाधुंध हमलों में 10,500 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं, जिनमें क़रीब 5,000 बच्चे हैं।
ज़ायोनी सेना ने ग़ज़ा में पूरे के पूरे मोहल्लों को इमारतों के मलबे में बदल दिया है और उसने अस्पतालों, स्कूलों, मस्जिदों और चर्चों को भी नहीं छोड़ा है। msm