बौखलाए नेतन्याहू ने बाइडन का प्रस्ताव भी ख़ारिज कर दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस्राईली प्रधानमंत्री बेनयामीन नेतन्याहू से क़ैदियों के मुद्दे को सुलझाने के लिए तीन दिनों के लिए लड़ाई रोकने को कहा है। इस संबंध में बाइडेन ने कहा है कि उन्होंने मंगलवार को नेतन्याहू से फोन पर बातचीत के दौरान झड़प रोकने को कहा था।
अमेरिकी और इस्राईली अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि तीन दिन के युद्ध विराम से गाजा में कुछ बंधकों को मुक्त कराने में मदद मिल सकती है। इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तीन दिवसीय युद्धविराम के बाइडेन के अनुरोध को खारिज कर दिया।
गज़्ज़ा पर पुनः क़ब्ज़े के लिए अमेरिका के विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नेतन्याहू ने धमकी दी है कि मुझे नहीं पता कि हमास के ख़ात्मे के बाद क्या होगा लेकिन उनके खात्मे से कम किसी भी चीज के साथ युद्ध समाप्त नहीं होगा।
नेतन्याहू ने युद्ध जारी रखने पर भी जोर दिया और इस बात पर जोर दिया कि "हमें हमास को नष्ट करने के मिशन के अंत तक धैर्य की आवश्यकता है और हम आधी-अधूरी जीत नहीं चाहते हैं।"
तीन दिवसीय संघर्ष विराम के लिए बाइडेन के अनुरोध पर नेतन्याहू का स्पष्ट विरोध दर्शाता है कि ज़ायोनी शासन अपने निकटतम सहयोगी, अमेरिका को भी महत्व नहीं देता है और केवल अपने वांछित लक्ष्यों के अनुरूप अमेरिकियों का उपयोग करता है।
जबकि बाइडेन ने ग़ज़्ज़ा युद्ध की शुरुआत में ही इस्राईल का दौरा किया जब हमास की ओर से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पर राकेटों की बारिश हो रही थी। इस ख़तरनाक दौरे के दौरान बाइडन ने इस्राईल के समर्थन का एलान करते हुए इस्राईल की रक्षा के लिए वाशिंगटन की प्रतिबद्धता की घोषणा की लेकिन ज़ायोनी प्रधानमंत्री अपने निकटतम सहयोगी का एक बुनियादी अनुरोध भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति का मतलब क़ैदियों को मुक्त करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय युद्धविराम नहीं है। ऐसा लगता है कि यह मुद्दा बाइडेन और नेतन्याहू के बीच एक नए विवाद की शुरुआत बन सकता है।
बाइडन के वाइट हाउस में प्रवेश के बाद से दोनों के बीच संबंध ठंडे रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को द्विपक्षीय बैठक के लिए आमंत्रित करने से व्यावहारिक रूप से परहेज़ भी किया था। आख़िरकार, दोनों की मुलाक़ात 20 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की वार्षिक बैठक के मौक़े पर हुई थी।
हालांकि ये दोनों राजनेता एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं लेकिन वाइट हाउस में बाइडेन के प्रवेश के साथ उन्होंने कठिन संबंधों का अनुभव किया है। बाइडेन ने नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार की बारम्बार आलोचना भी की है। (AK)