ज़ायोनियों के अत्याचारों से विश्व समुदाय का बढ़ता रोष
पश्चिमी द्वारा ज़ायोनियों के खुले समर्थन के बावजूद विश्व समुदाय, फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में ही आवाज़ उठा रहा है।
ग़ज़्ज़ा की अत्याचारग्रस्त जनता के समर्थन में अब भी दुनिया के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन किये जा रहे हैं।
शुक्रवार की रात अमरीका के हज़ारों लोगों ने न्यूयार्क नगर के टाइम्स स्कवाएर पर एकत्रित होकर ग़ज़्ज़ा में तत्काल युद्ध विराम की मांग की। यह लोग ग़ज़्जा में किये जाने वाले इस्राईल के जघन्य अपराधों की निंदा कर रहे थे। इसी प्रकार से ब्रिटेन में भी शुक्रवार को फ़िलिस्तीनियों के समर्थन और इस्राईल के अत्याचारों के विरोध में प्रदर्शन किये गए। यह प्रदर्शनकारी, ग़ज़्ज़ा वासियों के समर्थन में नारे लगा रहे थे। उन्होंने ज़ायोनी शासन के साथ सहयोग करने के कारण हथियार बनाने वाले एक कारख़ाने का भी घेराव किया।
फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल के अत्याचार इतने अधिक व्यापक हो चुके हैं कि कल तक इस अवैध शासन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों के नेता अब उसकी आलोचना करने पर मजबूर हो रहे हैं। यह नेता अब ग़ज़्ज़ा में संघर्ष विराम कराने की बातें कहने लगे हैं।इसी संदर्भ में नार्वे के प्रधानमंत्री जोनेस गार स्टोर ने शुक्रवार की रात को ग़ज़्ज़ा में इस्राईल की ओर से किये जाने वाले हमलों की भर्त्सना की।
उन्होंने कहा कि ग़ज़्ज़ा में इस्राईल की बमबारी, अन्तर्राष्ट्रीय निमयों का खुला उल्लंघन है। आम लोगों को अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है। एसे में दूसरे देशों की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का विरोध किया जाना चाहिए। नार्वे के प्रधानमंत्री का यह बयान बताता है कि अवैध ज़ायोनी शासन, ग़ज़्ज़ा में कितनी अधिक अमानवीय कार्यवाहियां कर रहा है कि वहां पर हमला आरंभ होने के महीना भर के बाद अंततः उसी के समर्थकों को उसके विरुद्ध बयान देने पड़ रहे हैं।
इस्राईल का आरंभ से समर्थन करने वाले फ़्रांस के राष्ट्रपति ने भी अब पैतरा बदला है। कल रात उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि इस्राईल को ग़ज़्ज़ा में बच्चों और महिलाओं की हत्याओं को रोकना चाहिए। मैक्रां ने कहा कि इस्राईल की बमबारी के लिए किसी भी प्रकार का औचित्य दर्शाया नहीं जा सकता। वहां पर संघर्ष विराम होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष विराम, इस्राईल के हित में होगा। उन्होंने कहा कि मैं यह चाहता हूं कि वे बमबारी को बंद करें। हालांकि नेतनयाहू ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रां के संघर्ष विराम की मांग को रद्द कर दिया है।
एसा लगता है कि इस्राईल से मैक्रां की यह मांग, किसी सदभावना के कारण नहीं है बल्कि फ़्रांसीसी समाज में बढ़ते फ़िलिस्तीनियों के समर्थन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से है। फ़्रांस में बहुत बड़े पैमाने पर ग़ज़्ज़ा में युद्ध रुवाने को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनकों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
इससे पता चलता है कि विश्व समुदाय के दबाव से बचने के लिए पश्चिमी नेताओं ने इस्राईल से संघर्ष विराम की मांग का नाटक करना शुरू कर दिया है हालांकि इसमें वे बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।
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