ग़ज़्ज़ा का शिफ़ा अस्पताल बना मुर्दाघर और जेल
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75 साल से अधिक समय से फिलिस्तीन के मज़लूम लोगों के खिलाफ अवैध जायोनी सरकार के अपराध यथावत जारी हैं और सात अक्तूबर से उसके अपराधों और पाश्विक हमलों का जो नया दौर आरंभ हुआ है उसने विनाशकारी रूप धारण कर लिया है।
(last modified 2023-11-15T09:10:39+00:00 )
Nov १५, २०२३ १४:३९ Asia/Kolkata

75 साल से अधिक समय से फिलिस्तीन के मज़लूम लोगों के खिलाफ अवैध जायोनी सरकार के अपराध यथावत जारी हैं और सात अक्तूबर से उसके अपराधों और पाश्विक हमलों का जो नया दौर आरंभ हुआ है उसने विनाशकारी रूप धारण कर लिया है।

उसकी मुख्य वजह अमेरिका और कुछ पश्चिमी व यूरोपीय देशों का खुला समर्थन है। हालांकि इस्राईल को हमेशा से इन देशों का समर्थन व आर्शीवाद प्राप्त रहा है मगर इस समय मानवाधिकारों की रक्षा के दावेदारों ने अपने चेहरों पर पड़े मुखौटों को हटा दिया है और पूरी निर्लज्जता के साथ अवैध जायोनी शासन का समर्थन कर रहे हैं।

अमेरिका और पश्चिमी व यूरोपीय देश गज्जा पट्टी में न केवल युद्ध विराम की बात तक नहीं कर रहे हैं बल्कि युद्ध विराम का विरोध कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलापने वाले देश फिलिस्तीन की मज़लूम जनता के खिलाफ इस्राईल के पाश्विक हमलों के जारी रहने की मांग कर रहे हैं। इसी तरह मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले देशों ने एक बार भी अवैध जायोनी सरकार के पाश्विक हमलों की भर्त्सना तक नहीं की। यही नहीं अमेरिका ने फास्फोरस बमों सहित दूसरे खतरनाक हथियारों को फिलिस्तीनी लोगों की हत्या के लिए दिया है और उसके सैनिक भी जायोनी सैनिकों के साथ मिलकर फिलिस्तीन के अत्याचारग्रस्त लोगों के खिलाफ अपराध करने में व्यस्त हैं।

जायोनी सैनिकों के पाश्विक हमलों में अब तक शहीद होने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या साढ़े 11 हज़ार से अधिक हो गयी है जिसमें सबसे अधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है। जायोनी सैनिकों ने गज्जा पट्टी के शेफा अस्पताल का कड़ा परिवेष्टन कर रखा है और परिवेष्टन के कारण कल इस अस्पताल के प्रांगड़ में ड़ेढ सौ से अधिक फिलिस्तीनियों को सामूहिक रूप से दफ्न कर दिया गया।

इस समय यह अस्पताल मुर्दाघर में परिवर्तित होने के अलावा प्रताड़ना केन्द्र में भी परिवर्तित हो गया। दूसरे शब्दों में जायोनी सैनिक फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार करके इस अस्पताल में उन्हें यातनायें दे रहे हैं। रोचक बात यह है कि जायोनी सरकार ने जिन क्षेत्रों को पहले सुरक्षा स्थान घोषित किया था अब यह सरकार उन क्षेत्रों पर भी बमबारी कर रही है। सवाल यह पैदा होता है कि इस्राईल ने जिन क्षेत्रों को पहले सुरक्षित घोषित किया था अब उन पर बमबारी क्यों कर रहा है? इस सवाल के जवाब में जानकार हल्कों का कहना है कि इस्राईल ने पहले सुरक्षित क्षेत्र इसलिए घोषित किया था ताकि फिलिस्तीनी सुरक्षित क्षेत्रों में इकट्ठा हो जायें और उन्हें एक साथ मारना इस्राईल के लिए सरल हो जाये।

अब कोई भी स्थान इस्राईल की बमबारी से सुरक्षित नहीं है। चाहे वह स्कूल हो, मस्जिद हो, गिरजाघर हो, अस्पताल हो या आवासीय क्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मस्जिदों, स्कूलों, आवासीय इलाकों और गिरजाघरों पर बमबारी और हमला युद्धापराध है परंतु यह कानून इस्राईल के लिए नहीं हैं। इस्राईल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा है और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले कभी भी उसके अमानवीय कृत्यों व हमलों की भर्त्सना तक नहीं करते हैं।

इस्राईल अपने पाश्विक हमलों का औचित्य दर्शाने के लिए कहता है कि वह मस्जिदों, अस्पतालों और आवासीय क्षेत्रों पर बमबारी इसलिए करता है कि क्योंकि उनके नीचे हमास ने सैनिक अड्डे बना रखे हैं जबकि यह दावा पूरी तरह झूठ है और वहां मारे जाने वाले आम नागरिक, बच्चे और महिलायें होती हैं। इसलिए फिलिस्तीनियों ने कहा है कि इस्राईल का दावा पूरी तरह झूठ है और उन्होंने राष्ट्रसंघ के कर्मचारियों को इन स्थानों का निरीक्षण किये जाने की मांग की है ताकि इस्राईल के झूठे दावे की वास्तविकता सामने आ जाये।

बहरहाल फिलिस्तीन के मज़लूम लोगों के खिलाफ इस्राईल के नृशंस व पाश्विक हमलों के जारी रहने की वजह अमेरिका और पश्चिमी व यूरोपीय देशों का समर्थन है और जब तब इस्राईल को इन देशों का अंधा और अतार्किक समर्थन हासिल रहेगा तब तक फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ अत्याचार जारी रहेंगे। MM

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