लाल सागर में अंसारुल्ला की कार्यवाही और अवैध ज़ायोनी शासन
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ग़ज़्ज़ा में जारी युद्ध के साथ ही अवैध ज़ायोनी शासन के विरुद्ध नए मोर्चें खुलने लगे हैं। 
(last modified 2023-11-21T04:34:23+00:00 )
Nov २१, २०२३ १०:०४ Asia/Kolkata

ग़ज़्ज़ा में जारी युद्ध के साथ ही अवैध ज़ायोनी शासन के विरुद्ध नए मोर्चें खुलने लगे हैं। 

जिस समय इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा पर हमला आरंभ किया था उसी समय से हिज़बुल्ला ने दक्षिणी लेबनान से ज़ायोनियों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया था।  अब यमन के प्रतिरोध कर्ताओं ने भी इस अवैध शासन के विरुद्ध एक नया मोर्चा खोल दिया है जिससे ज़ायोनियों में बहुत बेचैनी पाई जाती है। 

यमन के प्रतिरोधकर्ताओं ने रविवार को लाल सागर में ज़ायोनियों के एक माल वाहक जहाज़ को रोक लिया।  यह जहाज़ एक इस्राईली व्यापारी से संबन्धित है।  इस संबन्ध में यमन की सशस्त्र सेना ने एक बयान जारी करके घोषणा की है कि लाल सागर से गुज़रने वाले ज़ायोनियों का हर जहाज़ हमारा लक्ष्य होगा। 

यमन की सेना के प्रवक्ता यहया सरी ने कहा है कि अब्दुल मलिक बदरुद्दीन अलहूसी के आदेश पर हमने फिलिस्तीनियों का समर्थन करते हुए ज़ायोनियों के एक मालवाहक जहाज़ को पकड़कर यमन के तटीय क्षेत्र पर पहुंचा दिया है। 

इसी बीच यमन के अंसारुल्ला आन्दोलन के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य मुहम्मद अलबुख़ैती ने अल्जज़ीरा टीवी चैनेल से बात करते हुए बताया है कि अगर ग़ज्ज़ा युद्ध को रोका नहीं गया तो हमारे पर इस बारे मे बहुत से विकल्प मौजूद हैं जिनको हम पेश करेंगे। 

यमन के सूचना मंत्री ज़ैफ़ुल्ला अश्शामी ने लाल सागर में ज़ायोनियों के माल वाहक जहाज़ को रोके जाने के संदर्भ में कहा कि इस्राईल के वे जहाज़ जो लाल सागर से गुज़रते हैं उनकी पूरी डिटेल हमारे पास मौजूद है।  उनका कहना था कि ग़ज़्ज़ा वासियों के समर्थन में हम अपने देश के बाहर भी कार्यवाहियों को बढ़ाएंगे। 

अंसारुल्ला के प्रवक्ता मुहम्मद अब्दुस्सलाम ने कहा है कि लाल सागर में ज़ायोनियों के जहाज़ को रोकना तो अभी इब्तेदा है।  दुनिया को यह जान लेना चाहिए कि ग़ज़्ज़ा में इस्राईल ने अपनी कार्यवाहियां करके सारे ही अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है।  अपने घमणंड के कारण ज़ायोनियों ने शायद यह सोचा ही नहीं होगा कि उनके साथ एसा कुछ भी हो सकता है।  अब अपने जहाज़ के पकड़े जाने से वे बहुत परेशान हैं।  अंसारुल्ला के इस काम से इस्राईल को शाक लगा है। 

याद रहे कि ग़ज़्ज़ा पर हमला करके ज़ायोनी वैसे तो बुरे फंस चुके हैं लेकिन अब अपने विरुद्ध एक के बाद एक नया मोर्चा खुलने से उनकी हालत ख़राब होती जा रही है।  इससे यह भी पता चलता है कि अवैध ज़ायोनी शासन को क्षेत्र में प्रतिरोधकर्ताओं की ओर से की जाने वाली संभावित कार्यवाहियों का अनुमान भी नहीं हो पाया है।

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