साउथ अफ्रीका भी हुआ ज़ायोनी शासन से दूर
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ग़ज़्ज़ा की त्रासदी के कारण दक्षिणी अफ्रीका ने इस्राईल से दूर रहने का फैसला किया है।
(last modified 2023-11-23T06:39:02+00:00 )
Nov २३, २०२३ १२:०९ Asia/Kolkata

ग़ज़्ज़ा की त्रासदी के कारण दक्षिणी अफ्रीका ने इस्राईल से दूर रहने का फैसला किया है।

फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनियों के अत्याचारों के दृष्टिगत दक्षिणी अफ्रीका की संसद ने इस देश में इस्राईल के दूतावास को बंद करने का फैसला किया है।  इस हिसाब से वहां पर इस्राईल का दूतावास बंद हो जाएगा और दोनो पक्षों के बीच कूटनैतिक संबन्ध समाप्त हो जाएंगे। इस्राईल के राजदूत को दक्षिणी अफ्रीका से निकाल दिया जाएगा।

दक्षिणी अफ्रीका, अफ़्रीका महाद्वीप का एक बहुत ही प्रभावशाली देश है। इस देश ने अपारथाइड का अनुभव किया है।  यह देश पूरी दुनिया में अपराथाइड के विरोधकर्ता के रूप में जाना जाता है।  दक्षिण अफ्रीका के लोगों ने नैलसन मंडेला के नेतृत्व में दशकों तक अपारथाइड के विरुद्ध संघर्ष किया है।  वहां पर एक ज़माने में जातिवादी व्यवस्था स्थापित थी जिसका आम लोग विरोध करते थे।  दक्षिणी अफ्रीका की जनता ने लगातार अपारथाइड का विरोध करते हुए अंततः अपने देश में इस जातिवादी व्यवस्था को उखाड़ फेका।  वे आज भी अपारथाइड के कड़े विरोधी हैं। 

दक्षिणी अफ्रीका के अधिकारियों का मानना है कि अवैध ज़ायोनी शासन, एक जातिवादी शासन है जो यहूदियों को फ़िलिस्तीनियों पर वरीयता देता है।  वह उनके विरुद्ध जातिवादी भेदभाव रखता है।  साउथ अफ्रीका की विदेशमंत्री का कहना है कि फ़िलिस्तीन की गाथा, विगत में दक्षिणी अफ्रीका में नसली अलगाव और उत्पीड़न को दर्शाती है।  उनका कहना है कि हमने स्वयं भी जातिवादी भेदभाव को सहन किया है।  एसे में फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध किये जाने वाले जातिवादी भेदभाव पर हम चुप नहीं बैठ सकते। 

ग़ज़्ज़ा युद्ध के दौरान इस्राईल की ओर से फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार की दक्षिणी अफ्रीका की ओर से कई बार निंदा की जा चुकी है।  वे ग़ज़्ज़ा युद्ध को तत्काल रुकवाने की भी मांग कर चुके हैं।  यह देश, फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल के अत्याचारों को युद्ध अपराध मानता है।  नैल्डी पेंडोल के अनुसार पूरी दुनिया के सामने फ़िलिस्तीनियों का जातीय सफाया किसी भी स्थति में स्वीकार्य नहीं है।  दक्षिणी अफ्रीका ने तेलअवीव से अपने कूटनैतिकों को वापस बुलाने का फैसला कर लिया है।  साउथ अफ्रीका की जनता के अनुसार फ़िलिस्तीनियों का समर्थन एक बुनियादी मुद्दा है जिसका व्यवहारिक समर्थन अनिवार्य है।  फ़िलिस्तीनियों को अपने भविष्य के निर्धारण का पूरा अधिकार है जो उनको मिलना चाहिए। 

टीकाकारों का कहना है कि अफ्रीका महाद्वीप के एक अति प्रभावशाली देश के रूप में साउथ अफ्रीका की ओर से इस्राईल के साथ संबन्ध विच्छेद करना, विश्व के अन्य देशों के लिए एक मिसाल है।  इसका अनुसरण करते हुए अन्य देश यह दिखा सकते हैं कि वे किसी भी स्थति में ग़ज़्ज़ा में किये जा रहे विश्व के सबसे भयानक जातीय सफाए के संबन्ध में वे हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते।

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