फ़िलिस्तीनियों के बारे में अमरीका की नियत हुई ज़ाहिर
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ग़ज़्ज़ा में युद्ध विराम कराने के दूसरे प्रस्ताव को भी अमरीका ने वीटो कर दिया। 
(last modified 2023-12-09T04:45:36+00:00 )
Dec ०९, २०२३ १०:१५ Asia/Kolkata

ग़ज़्ज़ा में युद्ध विराम कराने के दूसरे प्रस्ताव को भी अमरीका ने वीटो कर दिया। 

संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य के रूप में संयुक्त राज्य अमरीका ने यूएई के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया जिसमें ग़ज़्ज़ा में युद्ध विराम कराए जाने की मांग की गई थी। 

शुक्रवार को सुरक्षा परिषद के आपातकालीन बैठक हुई थी जिसमें संयुक्त अरब इमारात ने ग़ज़्ज़ा में संघर्ष विराम के लिए प्रस्ताव पेश किया था।  इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 का समर्थन हासिल था।  अमरीका ने खुलकर इसका विरोध करते हुए इसे वीटो कर दिया जबकि ब्रिटेन इसमें अनुपस्थित रहा।  ग़ज़्ज़ा में तत्काल संघर्ष विराम के लिए प्रस्तुत किये गए प्रस्ताव को सौ से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त था। 

आपातकालीन बैठक बुलाने के लिए राष्ट्रसंघ के महासचिव ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर के अनुच्छेद-99 का प्रयोग किया था।  इस अनुच्छे का प्रयोग, राष्ट्र संघ में बहुत ही दुर्लभ स्थति में देखा गया है।  गुटेरस ने अपने कार्यकाल में पहली बार इसका प्रयोग किया है। राष्ट्रसंघ के महासचिव ने ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनियों द्वारा आरंभ किये गए युद्ध और इसके भयानक परिणामों के दृष्टिगत इस अनुच्छे का प्रयोग करने का फैसला किया था।  अनुच्छे-99 का प्रयोग अबतक केवल 9 बार ही किया गया है। 

यूएन के चार्टर के अनुच्छेद-99 के आधार पर राष्ट्रसंघ के महासचिव हर उस विषय को सुरक्षा परिषद में पेश कर सकते हैं जिसके बारे में वे यह समझते हों कि इससे अन्तर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा हो सकता है।  यह अनुच्छेद महासचिव को अनुमति देता है कि जब वे देखें कि विश्व की शांति को किसी मुद्दे से गंभीर ख़तरा है तो वे सुरक्षा परिषद के सदस्यों की बैठक आहूत करके उनसे इसको तत्काल रोकने की मांग कर सकते हैं।  सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में अमरीका के प्रतिनिधि ने कहा कि ग़ज़्ज़ा में तत्कालीन संघर्ष विराम के प्रस्ताव का वे विरोध करते हैं। 

अमरीका की ओर से ग़ज़्ज़ा में संघर्ष विराम का विरोध एसी हालत में किया जा रहा है कि जब वहां पर अबतक इस्राईल के पाश्विक हमलों में 17 हज़ार 500 से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं।  इन हमलों में 42 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हैं, अस्पतालों की बुरी हालत के कारण बहुत से फ़िलिस्तीनी घायल,  अपना उपचार नहीं करवा पा रहे हैं।  लगभग सात दिनों के अस्थाई युद्ध विराम के बाद ग़ज़्ज़ा में इस्राईली हमलों में रोज़ाना सैकड़ों फ़िलिस्तीनी शहीद हो रहे हैं।  वहां के हालात इतने ख़राब हो चुके हैं कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने उन्हें गंभीर मानवीय त्रासदी का नाम दिया है।  सुरक्षा परिषद में अमरीका द्वारा वीटो का प्रयोग यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था, विश्व में शांति स्थापित कराने जैसे अपने मूल दायित्व के निर्वाह में बहुत ही असहाय दिखाई दे रही है।

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