अमरीकी वीटो पर आने लगीं कड़ी प्रतिक्रियाएं
ग़ज़्ज़ा में संघर्ष विराम के प्रस्ताव को अमरीका द्वारा वीटो किये जाने से उसके विरुद्ध व्यापक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
गज्जा में तत्काल युद्धविराम के संबंध में पेश किये गए प्रस्ताव को अमेरिका ने वीटो कर दिया। अमरीकी वीटो के कारण ही यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। गज्जा पट्टी में युद्ध विराम के संबंध में यह तीसरा प्रस्ताव है जिसे अमेरिका ने वीटो करके पारित होने से रोक दिया।
राष्ट्रसंघ में फ़िलिस्तीन के प्रतिनिधि रेयाज़ मंसूर ने अमरीका के इस काम की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसकों बहुत ही ख़तरनाक काम बताया है। फ़िलिस्तीन के प्रतिनिध रेयाज़ मंसूर के अनुसार यह वीटो, अमरीका की ओर से इस्राईल के समर्थन का एक अन्य उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अमरीकी वीटो का संदेश यह है कि ज़ायोनी शासन, ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों का अभी और जनसंहार कर सकता है।
इस बारे में क्यूबा के राष्ट्रपति कहते हैं कि ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार में अमरीका, इस्राईल के साथ है। राष्ट्रसंघ में क़तर के प्रतिनिधि ने इस बात पर खेद जताया है कि सुरक्षा परिषद, अल्जीरिया की ओर से पेश किये गए प्रस्ताव को पारित कराने में विफल रही। सैफ आले सानी ने कहा कि रफह पर हमले की धमकी, क्षेत्र में अस्थिरता और अशांति को बढ़ाएगी।
उल्लेखनीय है कि ग़ज़्ज़ा में तत्कालीन संघर्ष विराम के प्रस्ताव को अमरीका ने इस हालत में वीटो किया है कि जब ग़ज़्ज़ा में शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनियों की संख्या बढ़कर 29195 हो गई है। सात अक्तूबर के बाद हमलों में शहीद होने वालों आंकड़ा अब 69170 हो चुका है।