ग़ज़्ज़ा में अपराध या हिटलर का जनंसहार
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ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ इस्राईल के अपराध हालिया दशकों में सबसे बड़े अपराधों में बन गए हैं इसलिए कई लोग इसे नरसंहार कहते हैं और इसकी तुलना द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मन नेता एडॉल्फ हिटलर के अपराधों से करते हैं।
(last modified 2024-02-21T06:47:30+00:00 )
Feb २१, २०२४ १२:०५ Asia/Kolkata

ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ इस्राईल के अपराध हालिया दशकों में सबसे बड़े अपराधों में बन गए हैं इसलिए कई लोग इसे नरसंहार कहते हैं और इसकी तुलना द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मन नेता एडॉल्फ हिटलर के अपराधों से करते हैं।

इस संबंध में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला दा सिल्वा ने चेतावनी दी कि ग़ज्ज़ा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के साथ जो हो रहा है, वह हिटलर के समय को छोड़कर किसी अन्य ऐतिहासिक काल में नहीं हुआ था।

उन्होंने जोर दिया कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में जो हो रहा है वह युद्ध नहीं है, यह नरसंहार है और एडॉल्फ हिटलर के कृत्यों की याद दिलाता है। दा सिल्वा ने जोर दिया कि इस्राईल का नरसंहार हिटलर जैसा है।

ग़ज़्ज़ा के खिलाफ इस्राईली-अमेरिकी युद्ध में अब तक 28 हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी जिनमें से कई महिलाएं और बच्चे हैं, शहीद हो चुके हैं जबकि 69 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं।

 इस्राईली हमलों में अधिकांश अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को निशाना बनाया गया और नष्ट कर दिया गया। साथ ही इस्राईल हमलों के कारण ग़ज़्ज़ा को दी जाने वाली सहायता गतिविधियां बाधित हो गई हैं और यहां तक ​​कि बंद भी हो गई हैं।

इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि इस्राईल ने इस संगठन के सदस्यों को नासिर अस्पताल में प्रवेश करने और उसकी स्थिति की जांच करने की अनुमति नहीं दी।

यह अस्पताल दक्षिणी ग़ज़्ज़ा का सबसे बड़ा अस्पताल है, जो इस्राईली हमलों के कारण ठप्प हो गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ग़ज़्ज़ा की स्थिति के बारे में कहा कि फिलिस्तीनी जनता की सामूहिक सज़ा का किसी भी तरह से औचित्य पेश नहीं किया जा सकता।

ग़ज़्ज़ा में मानवीय स्थिति अवर्णनीय है और कहीं भी कोई भी सुरक्षित नहीं है। फिलिस्तीनियों के खिलाफ इस्राईल के अपराधों की गंभीरता ऐसी है कि हालिया महीनों में और इस्राईल द्वारा युद्ध जारी रखने और फिलिस्तीनियों की हत्या पर जोर देने के साथ विभिन्न देशों ने इस्राईल द्वारा किए गए अपराधों की निंदा की है और इन अपराधों को ख़त्म करने की मांग की है।

इस संबंध में दक्षिण अफ़्रीका ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ नरसंहार की शिकायत भी की।

दक्षिण अफ्रीका की शिकायत में कहा गया है कि इस्राईली ने नरसंहार की रोकथाम और सज़ा के संबंध में कन्वेंशन के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

इस शिकायत के बाद अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया कि इस्राईल को इंसानों के ख़िलाफ नरसंहार को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए।

 

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