अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को धोखा देने का इस्राईली षडयंत्र, हासबारा
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इस्राईली प्रचारतंत्र हासबारा, वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को धोखा देने का इस्राईली षडयंत्र है।
(last modified 2024-03-25T09:33:30+00:00 )
Mar २५, २०२४ १४:३३ Asia/Kolkata
  • हासबाराःअन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को धोखा देने का इस्राईली षडयंत्र
    हासबाराःअन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को धोखा देने का इस्राईली षडयंत्र

इस्राईली प्रचारतंत्र हासबारा, वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को धोखा देने का इस्राईली षडयंत्र है।

पार्सटुडे- एसी हालत में कि जब इस्राईल, फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध जघन्य अपराध करने में लगा हुआ है, पश्चिम के प्रमुख संचार माध्यमों में जो ख़बरे चल रही हैं वे सामान्यतः इस्राईल के पक्ष में होती हैं। 

अबतक यह संचार माध्यम अपनी तथाकथित निष्पक्ष छवि के दृष्टिगत अवैध अधिकृत क़ुद्स में होने वाली झड़पों को, दो पक्षों के बीच होने वाली झड़प के रूप में दर्शाते आए हैं।  इसी विषय के दृष्टिगत इस्राईल की आक्रामक एवं हिंसक कार्यवाही को वे आत्मसुरक्षा के रूप में एक स्वभाविक प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं जिसमें हज़ारों की संख्या में फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हो चुके हैं।

अवैध ज़ायोनी शासन इस बात को भलिभांति जानता है कि धारणा ही वास्तविकता को आकार देती है। एसे समय में कि जब हर प्रकार के दंड से स्वयं को सुरक्षित समझते हुए इस्राईल, फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध जघन्य अपराध करने में व्यस्त है, अपने इन अपराधों को वह केवल उसी स्थति में जारी रह सकता है कि जब एक एसा सशक्त प्रचारिक माध्यम हो जिसके ज़रिए वह फ़िलिस्तीन से सहानुभूति रखने वाली अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का डटकर मुक़ाबला कर सके।

Hasbara "हासबारा" हिब्रु भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है स्पष्टीकरण।  सार्वजनिक कूटनीति के संदर्भ में यह इस्राईल का प्रचार एवं प्रसार माध्यम है।  दूसरे शब्दों में हासबारा, इस्राईल के स्ट्रैटेजिक लक्ष्य और सूचना युद्ध को आपस में जोड़ेने का एक हथकण्डा है।  इस्राईल के इस प्रचारिक तंत्र के अनुसार सार्वजनिक कूटनीति को रणनीतिक रूप से विदेश नीति की प्राथमिकता में होना चाहिए ताकि विश्व स्तर पर अवैध ज़ायोनी शासन की सकारात्मक छवि बन सके।  विशेषकर इसलिए क्योंकि 1948 में अपने गठन के समय से इस अवैध शासन को कई प्रकार की चुनौतियों का समाना रहा है। 

आधुनिक काल में हासबारा द्वारा प्रोपगंडा, सामान्यतः वीडिय, इन्फोग्राफ़िक्स, व्यापक सोशल मीडिया पोस्ट और हैशटैग के माध्यम से किया जाता है जिसके पीछे इस्राईल होता है।  हासबारा के प्रचार व प्रसार का लक्ष्य, मीडिया, संस्थाओं, संगठनो, शोध केन्द्रों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से डिप्लोमैट्स, राजनेताओं और आम लोगों की घारणा को इस्राईल के हित में बदलना होता है।

महिला सैनिक, ज़ायोनी प्रोपेगंडे का हिस्सा

इस्राईल ने सन 2012 में ग़ज़्ज़ा के आठ दिवसीय युद्ध के विषय को सोशल मीडिया के पूर्व प्लेटफार्म ट्वीटर पर रखा था।  इस युद्ध के दौरान इस्राईल ने अमरीकी और यूरोपीय संचार माध्यमों से अपने हित में खूब काम लिया।  हासबारा को ब्राउज़र, सर्च इंजन, एल्गोरिदम तथा अन्य स्वचालित तंत्रों के माध्यम से संचालित किया जाता है जो दर्शकों द्वारा पेश की गई सामग्री को नियंत्रित करता है।  इस प्रकार इस्राईल स्वयं को बिल्कुल ही निर्दोष और फ़िलिस्तीनियों के तथाकथित आतंकवाद की भेंट के रूप में पेश करता है।  यह एक एसी थ्योरी जो अपने अस्तित्व पर हमले के विरुद्ध आत्मरक्षा के अधिकार को सुनिश्चित बनाती है। 

पश्चिमी नेताओं के सहयोग से अपने विरुद्ध होने वाली प्रतिक्रियाओं को सेंसर करता इस्राईल

इस प्रकार से इस्राईल, पश्चिमी नेताओं के सहयोग से पश्चिमी संचार माध्यमों को अपने हित में प्रयोग करने लगा और अपने विरुद्ध होने वाली प्रतिक्रियाओं को सेंसर करने में जुट गया।  यही बात तनाव बढाने की शुरूआत हुई जिसके नतीजे में ग़ज़्ज़ा पर भीषण बमबारी की गई।  सन 2014 में ग़ज़्ज़ा के लोगों के विरुद्ध इस्राईल का युद्ध, हासबारा के दुष्प्रचारों के बावजूद इस शासन के अपराधों से विश्व जनमत की नाराज़गी के कारण सफल सिद्ध नहीं हो पाया। 

सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में निर्दोष लोगों के जनसंहार और विध्वंस के चित्रों ने इस्राईली प्रचारतंत्र हासबारा के नीति निर्धारकों को अधिक संगठित होकर जनसंपर्क अभियानों को चलाने तथा अपने अपराधों को दुनिया से छिपाने के लिए दोगुना प्रयास करने पर मजबूर किया।  हासबारा के दुष्प्रचारों के विफल होने की सूरत में इस्राईल, अपनी पुरानी रणनीति को पुनर्जीवित करना चाहता है जिसके अन्तर्गत वह स्वयं को आतंकवाद का शिकार और हमास को आतंकवाद के प्रतिनिधि के रूप में दिखाना चाहता है।

ग़ज़्ज़ा युद्ध के साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर धोखा देने के लिए इस्राईल ने व्यापक स्तर पर दुष्प्रचार शुरू कर दिया

वर्तमान समय में हम वैश्विक संचार माध्यमों में मीडिया के दो आयामी रूप के साक्षी हैं।इसमें इस्राईल को निर्दोष और आतंकवाद के शिकार के रुप में दिखाया गया है।  इस तरह से इस्राईल की हिंसक कार्यवाहियों की आलोचना को आतंकवाद के समर्थन के रूप में पेश किया जाता है।  इसी रणनीति के अन्तर्गत इस्राईल की नीतियों की किसी भी प्रकार की आलोचना को यहूदी विरोधी गतिविधियों से जोड़ दिया जाता है।

हालिया वर्षों के दौरान इस्राईल के लिए स्ट्रैटेजिक ख़तरों में से एक, BDS आन्दोलन है जो इस्राईल के विरुद्ध प्रतिबंधों और उसके बायकाट की मांग करता है।  इस्राईली अधिकारियों का प्रयास है कि वे लोग जो बीडीएस आन्दोलन का समर्थन करते हैं उनको यहूदी विरोधी दर्शाया जाए।  इसी के साथ यह भी बताया जाए कि वे लोग आतंकवाद के साथ हैं। 

ज़ायोनियों के विरुद्ध होने वाली आलोचनाओं ने इस्राईली प्रचारतंत्र हासबारा के नीति निर्धारकों को अधिक संगठित होकर जनसंपर्क अभियानों को चलाने तथा अपने अपराधों को दुनिया से छिपाने के लिए दोगुना प्रयास करने पर मजबूर किया।  हासबारा का एक अन्य काम, प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों पर उस यहूदी विरोधी फ़र्ज़ी परिभाषा को अपनाने के लिए दबाव डालना है जिसको होलोकास्ट मेमोरियल यूनियन ने गढ़ा है। 

इस्राईली प्रचारतंत्र हासबारा का मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीनियों की बुरी छवि बनाकर पश्चिम में उनको बहुत ही बुरे लोगों के रूप में पेश करना है ताकि इस्राईल की आलोचना और उसके विरोध को रोका जा सके।

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