क्या ग़ज़्ज़ा, विश्व के न्याय प्रेमियों को एकजुट कर रहा है?  
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i135086-क्या_ग़ज़्ज़ा_विश्व_के_न्याय_प्रेमियों_को_एकजुट_कर_रहा_है
पार्सटुडे- रम्ज़ी बारुड (Ramzy Baroud)  के कथानानुसार फ़िलिस्तीनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय समरसता व एकजुटता का आधार धार्मिक, जातीय, भौगोलिक या सांस्कृतिक सीमा नहीं है।
(last modified 2024-05-20T08:57:08+00:00 )
May २०, २०२४ १४:१२ Asia/Kolkata
  • क्या ग़ज़्ज़ा, विश्व के न्यायप्रेमियों को एकजुट कर रहा है?  
    क्या ग़ज़्ज़ा, विश्व के न्यायप्रेमियों को एकजुट कर रहा है?  

पार्सटुडे- रम्ज़ी बारुड (Ramzy Baroud)  के कथानानुसार फ़िलिस्तीनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय समरसता व एकजुटता का आधार धार्मिक, जातीय, भौगोलिक या सांस्कृतिक सीमा नहीं है।

"सांस्कृतिक एकता, न सांस्कृतिक बर्ताव" नामक ग़ज़्ज़ा के बारे में लेख ने सैमुअल हंटिंगन के विचारों को किस प्रकार चुनौती दी।  इस लेख को Ramzy Baroud ने लिखा। इस लेख में उन्होंने ग़ज़्ज़ा पट्टी के हालिया परिवर्तनों और इंटरनेश्नल पैमाने पर उस पर होने वाले परिवर्तनों की समीक्षा और उसका विश्लेषण किया।

इसी प्रकार इस लेख में उन्होंने सैमुअल हंटिंगन के विचारों व दृष्टिकोणों की समीक्षा की और वह इंटरनेश्नल पैमाने पर होने वाले बुनियादी परिवर्तनों पर बल देते हैं।

एतिहासिक परिवर्तन

Ramzy Baroud पहचानों और एतिहासिक राजनीतिक परिवर्तनों विशेषकर रोम साम्राज्य में होने वाले परिवर्तनों की ओर संकेत करते हैं जो इस बात का सूचक है कि पहचानें हमेशा बदलती रही हैं। इसी प्रकार Ramzy Baroud कहते हैं कि पहचानों की परिभाषा करने में जंगों, झड़पों और सांस्कृतिक परिवर्तनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इस मामले को राजनीतिक विचारधारा के निरंतर परिवर्तन के एक कारक के रूप में पूरे इतिहास में बारमबार देखा जा सकता है।

सांस्कृतिक प्रभाव और उसका वैश्विक होना

Ramzy Baroud शीतयुद्ध के बाद ब्रिटेन और अमेरिका के सांस्कृतिक प्रभाव की ओर संकेत करते और उनका मानना है कि यह प्रभाव विभिन्न समाजों में प्राकृतिक रूप से सांस्कृतिक विस्तार की दिशा में विघ्न का कारण बना है। वह विभिन्न समाजों के मध्य संपर्क स्थापित करने के साधन के रूप में अंग्रेज़ी भाषा की भूमिका की ओर संकेत करते हैं और सामाजिक मूल्यों की दोबारा परिभाषा करते हैं।

सभ्यताओं के मध्य टकराव के दृष्टिकोण की समीक्षा

Ramzy Baroud सभ्यताओं के मध्य टकराव के दृष्टिकोण की आलोचना करते हैं। सभ्यताओं के मध्य टकराव के दृष्टिकोण को सैमुअल हंटिंगटन ने पेश किया था। हंटिंगटन का मानना था कि दुनिया बहुत बड़ी सभ्यताओं में विभाजित हो जायेगी जिसकी परिभाषा विवादों और लड़ाइयों द्वारा की जायेगी। Ramzy Baroud इस दृष्टिकोण को जातिवादी और राजनीतिक हथकंडा बताते हैं जो पूर्व सोवियत संघ के विघटन और इराक़ के पहले युद्ध और पश्चिम के सैन्यकरण के बाद मज़बूत हो गया।

उनका मानना है कि इन दृष्टिकोणों को राजनीतिक ज़रूरतों के दृष्टिगत बनाकर पेश किया गया और पश्चिम के लिए वांछित नतीजा न निकल सका यानी दुनिया को एक बंधक के रूप में न रख सके।

नये विश्व का उदय

लेखक नये विश्व के उदय पर बल देता है जो सभ्यताओं के आधार पर नहीं बल्कि वही पुराने एतिहासिक आदर्शों के आधार पर गठित होगा। कुछ लोग अपनी शक्ति के विस्तार के प्रयास में हैं जबकि कुछ अन्य आज़ादी, न्याय और बराबरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। Ramzy Baroud  का मानना है कि ये आदर्श धार्मिक, सांस्कृतिक, जातीय और भौगोलिक रुझानों से हटकर हैं और बड़ी शक्तियों का भी मानना है कि वे एकजुट हो रही हैं।

ग़ज़्ज़ा की जंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता

Ramzy Baroud ग़ज़्ज़ा की जंग को इंटरनेश्नल पैमाने पर एकता के बिन्दु के रूप में इशारा करते हैं जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई पहचान के गठन का कारण बनेगा। वह बयान करते हैं कि फ़िलिस्तीनियों के साथ समरसता का आधार धर्म, जाति, भूगोल या संस्कृति नहीं है बल्कि उसका आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की मांग है। फिलिस्तीनियों के साथ समरसता को यूरोप से लेकर उत्तरी अमेरिका और अफ्रीक़ा से लेकर लैटिन अमेरिका तक देखा जा सकता है। ये वे जगहें हैं जहां विश्व की विभिन्न जातियों, रंगों, धर्मों और संस्कृतियों के लोग एकत्रित हुए हैं।

नतीजाः Ramzy Baroud अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले राजनीतिक और आर्थिक विभाजन के प्रतिरोध के महत्व की ओर संकेत करते हैं और उनका मानना है कि ग़ज़्ज़ा युद्ध ने दर्शा दिया है कि विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों से आगे बढ़कर एकजुट हुआ जा सकता है।

यह विश्लेषण इस बात का सूचक है कि आज की दुनिया के संबंध उससे बहुत अधिक जटिल हैं जो प्राचीन समय में सभ्यताओं के मध्य होता था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को समझने और उसके विश्लेषण के लिए नई पद्धति की ज़रूरत है।

स्रोतः Baroud, Ramzy. 2024. Civilizational Unity, Not Clash: How Gaza Challenged Samuel Huntington’s Fantasies

कीवर्ड्सः जंगे ग़ज़्ज़ा, सभ्यताओं के मध्य टकराव का दृष्टिकोण, सैमुअल हंटिंगटन, अंतरराष्ट्रीय न्याय