बैतुल मुक़द्दस में ज़ायोनियों की भड़काऊ कार्यवाहियां
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अतिवादी ज़ायोनियों ने मुसलमानों के पवित्र स्थल मस्जिदुल अक़सा पर व्यापक हमले का आह्वान किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०५, २०१६ ११:०९ Asia/Kolkata

अतिवादी ज़ायोनियों ने मुसलमानों के पवित्र स्थल मस्जिदुल अक़सा पर व्यापक हमले का आह्वान किया है।

5 जून वर्ष 1967 में पूर्वी बैतुल मुक़द्दस पर ज़ायोनी सैनिकों द्वारा क़ब्ज़ा किए जाने की बरसी के अवसर पर कुछ अतिवादी ज़ायोनियों ने सोशल मीडिया पर कैम्पेन चला कर रविवार 5 जून को मस्जिदुल अक़सा पर व्यापक हमले का आह्वान किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में ज़ायोनी शासन के मंत्रीमंडल ने भी बैतुल मुक़द्दस के यहूदीकरण और ज़ायोनी काॅलोनियों के विस्तार के लिए बाईस करोड़ डाॅलर का बजट स्वीकृत किया है। ज़ायोनी शासन की इस प्रकार की भड़काऊ कार्यवाहियां पहले भी होती रही हैं जिन पर फ़िलिस्तीनियों ने हमेशा कड़ी प्रतिक्रिया दिखाई है। वर्ष 2000 में इस्राईल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल शैरून ने मस्जिदुल अक़सा में घुस कर मुसलमानों के पहले क़िब्ले का अनादर किया था जिसके बाद फ़िलिस्तीनियों ने ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ इंतेफ़ाज़ा आंदोलन आरंभ कर दिया था और यह शासन उस आंदोनल को रोकने में विफल रहा था।

 

इस समय भी कुछ एेसे ही हालात दिखाई दे रहे हैं और ज़ायोनियों की ओर से फ़िलिस्तीनियों और मुसलमानों के पवित्र स्थलों के अनादर पर इस्राईल के विरुद्ध आक्रोश बढ़ता जा रहा है। फ़िलिस्तीनियों ने हमेशा यह दर्शाया है कि वे ज़ायोनी शासन की इस प्रकार की अपमानजनक कार्यवाहियों को सहन नहीं करेंगे। हालिया महीनों में बैतुल मुक़द्दस के समर्थन में और ज़ायोनियों के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों में वृद्धि इस बात की सूचक है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ फिर से एक आंदोलन आरंभ हो रहा है जिसे टीकाकारों ने तीसरे इंतेफ़ाज़ा आंदोलन का नाम दिया है। यह एेसी स्थिति में है कि जब बैतुल मुक़द्दस का समर्थन व्यापक आयाम लेता जा रहा है और इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ की शिक्षा, विज्ञान व संस्कृति संबंधी संस्था यूनेस्को ने भी औपचारिक रूप से बैतुल मुक़द्दस और उसकी एेतिहासिक धरोहर के समर्थन की घोषणा की है। (HN)