लेबनान के नये महासचिव के चयन का परिणाम और उसका महत्व
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पार्सटुडे- सैय्यद हसन नस्रुल्लाह की शहादत के एक महीने बाद लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन ने एलान किया है कि शैख़ नईम क़ासिम को हिज़्बुल्लाह का नया महासचिव बना दिया गया है।
(last modified 2024-10-31T09:00:32+00:00 )
Oct ३१, २०२४ १४:२८ Asia/Kolkata
  • लेबनान के नये महासचिव के चयन का परिणाम और उसका महत्व

पार्सटुडे- सैय्यद हसन नस्रुल्लाह की शहादत के एक महीने बाद लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन ने एलान किया है कि शैख़ नईम क़ासिम को हिज़्बुल्लाह का नया महासचिव बना दिया गया है।

ज़ायोनी सरकार ने एक आतंकवादी कार्यवाही और भीषण आक्रमण करके 27 सितंबर को दक्षिणी लेबनान में सैय्यद हसन नस्रुल्लाह को शहीद कर दिया था।  इस अपराध के 33 दिनों के बाद 70 वर्षीय शैख़ नईम क़ासिम को लेबनान के हिज़्बुल्लाह का नया महासचिव चुना गया है। इससे पहले वह हिज़्बुल्लाह के उपमहासचिव थे।

 

शैख़ नईम क़ासिम का हिज़्बुल्लाह के नये महासचिव के रूप में चयन कुछ पहलुओं से महत्वपूर्ण है।

 

पहला पहलु व आयाम यह है कि शैख़ नईम क़ासिम ने हिज़्बुल्लाह और अमल दोनों आंदोलनों व संगठनों में काम किया है। वह उन व्यक्तियों में से हैं जिनकी अमल और हिज़्बुल्लाह की स्थापना व गठन में भूमिका है और उनकी यह विशेषता इस बात का कारण बनेगी कि वह हिज़्बुल्लाह की सैनिक ताक़त और उसके ढांचे से अवगत रहें।  

 

इस संबंध में लेखक और राजनीतिक विश्लेषक हसन इब्राहीम ने कहा कि यह चुनाव शैख़ नईम क़ासिम के व्यक्तित्व के कारण हुआ है। शैख़ नईम क़ासिम एक धार्मिक और सक्रिय व्यक्ति हैं और वह एक मज़बूत व्यक्ति हैं।

 

शैख़ नईम क़ासिम का हिज़्बुल्लाह के नये महासचिव के रूप में चुनाव इस महत्व का सूचक है कि ज़ायोनी सरकार के अपराधों के बावजूद और इसी प्रकार हिज़्बुल्लाह के बहुत से कमांडरों व नेताओं की शहादत के बावजूद यह आंदोलन यथावत मज़बूत है और अपने नेता सैयद हसन नस्रुल्लाह की शहादत के शोक से बाहर आ गया है। हिज़्बुल्लाह के नये महासचिव का चुनाव उसके अंदर एकता व एकजुटता का सूचक है।

 

शैख़ नईम क़ासिम का हिज़्बुल्लाह के नये महासचिव के रूप में चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलु यह है कि हिज़्बुल्लाह आंदोलन ज़ायोनी सरकार के साथ मुक़ाबलों को यथावत जारी रखे हुए है और इस ग़ैर क़ानूनी सरकार के साथ मुक़ाबले को उसने अपने एक मूल सिद्धांत के रूप में सर्वोपरि रखा है।  

 

शैख़ नईम क़ासिम 30 वर्षों से अधिक समय तक हिज़्बुल्लाह के उपमहासचिव थे और इसी प्रकार वर्ष 1993, 1996,2000 और 2006 की जंगों में वह मौजूद थे जिसकी वजह से उन्हें काफ़ी अनुभव प्राप्त है और यह चीज़ इस बात की सूचक है कि शैख़ नईम क़ासिम के दौर में भी हिज़्बुल्लाह सैय्यद हसन नस्रुल्लाह के मार्ग को जारी रखेगा। दूसरे शब्दों में हिज़्बुल्लाह क़ुद्स की अतिग्रहणकारी सरकार से मुक़ाबले को जारी रखेगा।

 

इस संबंध में अंतिम बिन्दु यह भी है कि हिज़्बुल्लाह के नये महासचिव के रूप में शैख़ नईम क़ासिम का चुनाव ऐसी हालत में हुआ है जब ज़ायोनी सरकार प्रतिरोध के नेताओं और कमांडरों की हत्या कर रही है जो इस बात का सूचक है कि हिज़्बुल्लाह के कमांडर न केवल ज़ायोनी सरकार से नहीं डरते हैं बल्कि पूरी जानकारी के साथ जेहाद और शहादत के मार्ग को जारी रखे हुए है और यह वही बुनियादी बिन्दु है जिसके समझने से ज़ायोनी सरकार असमर्थ है और वह यह ग़लत सोच रही है कि कमांडरों व नेताओं को शहीद करने से हिज़्बुल्लाह या दूसरे प्रतिरोधक गुट समाप्त हो जायेंगे। MM

 

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