कौन वास्तविक तस्वीर है?
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कौन वास्तविक तस्वीर है?
पार्सटुडे- सोशल प्लेटफ़ार्म एक्स के एक यूज़र ने PIANIST फ़िल्म की तुलना ग़ाज़ा में कमाल अलउदवान अस्पताल के प्रमुख के विरोध जताने वाली हालत से की है।
X के यूज़र इल्यास ने हालीवुड की एक फ़िल्म "PIANIST" की एक तस्वीर की तुलना ग़ाज़ा में कमाल उदवान अस्पताल के प्रमुख डा᳴क्टर हेसाम अबू सफ़िया की विरोध जताने वाली तस्वीर से की है और लिखा है कि एक फ़िल्म है और वास्तविक तस्वीर है।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार PIANIST फ़िल्म वर्ष 2002 में बनाई गयी थी और इस फ़िल्म में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों को मज़लूम दिखाया गया है। दूसरी ओर उत्तरी ग़ाज़ा पट्टी में कमाल उदवान अस्पताल के प्रमुख हेसाम अबू सफ़िया की उन तस्वीरों को दिखाया है जिसमें वह ज़ायोनी सैनिकों के टैंको के सामने आपत्ति दर्शा रहे हैं, फ़िलिस्तीनी जनता की मज़लूमियत की वास्तविक तस्वीर और एक तस्वीर ज़ायोनी सैनिकों के अपराध की।
एक ज़ायोनी सैनिक अधिकारी अमेरिकी टीवी चैनल एबीसी से वार्ता में स्वीकार किया कि कमाल उदवान अस्पताल के प्रमुख को ज़ायोनी सैनिकों ने बंदी बना लिया है।
यह उस हालत में है कि जब राष्ट्रसंघ ने कमाल उदवान अस्पताल के प्रमुख को रिहा किये जाने की मांग की है और ग़ाज़ा में चिकित्सा केन्द्रों को लक्ष्य बनाये जाने को बंद करने का आह्वान किया है।
ज़ायोनी सरकार ने पश्चिमी देशों के व्यापक समर्थन से 7 अक्तूबर 2023 से ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी किनारे पर फ़िलिस्तीन के मज़लूम लोगों के ख़िलाफ़ व्यापक युद्ध आरंभ कर दिया है परंतु अब तक घोषित लक्ष्यों में से किसी भी एक लक्ष्य को वह हासिल नहीं कर सकी है।
इसके मुक़ाबले में ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध और लेबनान, इराक़, यमन और सीरिया के प्रतिरोधकों गुटों ने एलान कर रखा है कि वे अतिग्रहणकारी इस्राईल के अपराधों का बदला लेकर रहेंगे।
प्राप्त अंतिम रिपोर्टों के अनुसार ज़ायोनी सरकार के पाश्विक हमलों में अब तक 45 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद और एक लाख 8 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हो चुके हैं।
ज्ञात रहे कि ब्रिटेन की साम्राज्यवादी नीति के तहत ज़ायोनी सरकार का ढांचा वर्ष 1917 में ही तैयार हो गया था और विश्व के विभिन्न देशों व क्षेत्रों से यहूदियों व ज़ायोनियों को लाकर फ़िलिस्तीनियों की मातृभूमि में बसा दिया गया और वर्ष 1948 में ज़ायोनी सरकार ने अपने अवैध अस्तित्व की घोषणा कर दी। उस समय से लेकर आजतक विभिन्न बहानों से फ़िलिस्तीनियों की हत्या, नरसंहार और उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा यथावत जारी है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान सहित कुछ देश इस्राईल की साम्राज्यवादी सरकार के भंग व अंत किये जाने और इसी प्रकार इस बात के इच्छुक हैं कि जो यहूदी व ज़ायोनी जहां से आये हैं वहीं वापस चले जायें। MM