तुर्की में पैग़म्बरे इस्लाम के चोग़े की ज़ियारत
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रमज़ान के पवित्र महीने के पहले जुमे के अवसर पर तुर्की के इस्तंबोल नगर में पैग़म्बरे इस्लाम से संबंधित चोग़े को दर्शन के लिए प्रस्तुत किया गया।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jun ११, २०१६ १५:२० Asia/Kolkata
  • तुर्की में पैग़म्बरे इस्लाम के चोग़े की ज़ियारत

रमज़ान के पवित्र महीने के पहले जुमे के अवसर पर तुर्की के इस्तंबोल नगर में पैग़म्बरे इस्लाम से संबंधित चोग़े को दर्शन के लिए प्रस्तुत किया गया।

इस्तंबोल की ख़रक़ए शरीफ़ जामे मस्जिद में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का यह पवित्र चोग़ा, हर साल रमज़ान के पहले शुक्रवार को श्रद्धालुओं के सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाता है। इस्तंबोल की नगरपालिका, लोगों को विभिन्न स्थानों से इस मस्जिद तक पहुंचाने के लिए विशेष बसों का प्रबंध करती है। इस अवसर पर देश-विदेश से हर साल लाखों लोग पैग़म्बरे इस्लाम के चोग़े के दर्शन के लिए इस्तंबोल की ख़रक़ए शरीफ़ जामे मस्जिद पहुंचते हैं।

ख़रक़ए शरीफ़ जामे मस्जिद तुर्की में पैग़म्बरे इस्लाम का पवित्र चोग़ा

 

क्या है इस चोग़े का इतिहास?

 

बताया जाता है कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने अपना चोग़ा अपने एक साथी उवैसे क़रनी को उपहार स्वरूप दिया था। उसमानी शासक सुल्तान सलीम प्रथम के काल में यह चोग़ा, वर्तमान सऊदी अरब के हेजाज़ से इस्तंबोल लाया गया था। बाद में सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय ने आदेश दिया कि इस पवित्र चोग़े को रखने के लिए एक संदूक़ बनाया जाए और उसे केवल रमज़ान महीने के पहले जुमे को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाए। तभी से यह प्रथा इस मस्जिद में प्रचलित है और हर साल इसी दिन इसका प्रदर्शन किया जाता है। (HN)