सीरिया की धरती पर इज़राइली शासन का अंतिम लक्ष्य क्या है?
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सीरिया के शहर अल-सुवैदा में ज़ायोनियों की मौजूदगी
पार्स टुडे - दक्षिणी सीरिया के अल-कुनैत्रा में कृषि भूमि पर इज़राइल की तोपखाने की हमले ने एक बार फिर ज़ायोनी शासन की सीमा पार दखलंदाजी के चिंताजनक पहलुओं को उजागर किया है।
ज़ायोनी शासन के सैनिकों ने रविवार को दक्षिणी सीरिया के अल-कुनैत्रा के ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि पर गोलाबारी की। पार्स टुडे द्वारा अल-अरबी अल-जदीद वेबसाइट के हवाले से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, सुनाई देने वाली विस्फोटों की आवाज़ें इज़राइल के दक्षिणी सीरिया के अल-कुनैत्रा और दारा प्रांतों के बीच स्थित 'डेथ ट्रायंगल' क्षेत्र पर तोपखाने के हमले की थीं। यह हमला ज़ायोनी सैनिकों द्वारा अल-कुनैत्रा के उत्तरी ग्रामीण इलाके में जबता अल-खशब शहर और औफानिया गांव पर हमले के एक सप्ताह बाद किया गया।
ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब जॉलानी प्रशासन और इज़राइली शासन के बीच अमेरिकी निगरानी में गुप्त वार्ताओं की खबरें चल रही हैं। यह समयिकता तेल अवीव की रणनीति के बारे में सवाल खड़े करती है: क्या दमिश्क पर दबाव डालने और दक्षिणी सीरिया की सुरक्षा समीकरणों को बदलने के लिए गोलाबारी और वार्ता दो पूरक उपकरण हैं?
इसी संबंध में, अरब लेखक और शोधकर्ता 'मोहिब अल-रिफाई' ने जॉलानी प्रशासन और इज़राइली शासन के बीच अमेरिकी निगरानी में 'संयुक्त समन्वय तंत्र' नामक ढांचे के तहत चल रही वार्ताओं और तेल अवीव द्वारा दमिश्क सरकार के साथ एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा कि सीरिया के शासकों का यह कदम देश की जनता की इच्छा के विपरीत है और वे स्पष्ट रूप से इज़राइली शासन को मान्यता देने के विरोधी हैं।
अरब राजनीतिक अनुसंधान और अध्ययन केंद्र ने अगस्त 2025 में सीरिया की जनता की राय पर एक जनमत सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की थी, जो स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि 74% सीरियाई इज़राइल को मान्यता देने से इनकार करते हैं और इसके विरोध में हैं। यह विरोध केवल एक प्रतीकात्मक रुख या राष्ट्रवादी नारे के आधार पर नहीं है, बल्कि इज़राइल की एक औपनिवेशिक और कब्जाधारी शक्ति के रूप में जटिल परिभाषा पर आधारित है जो बस्तीवाद को बढ़ावा देती है, सीरियाई गोलान हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और एक विस्तारवादी शक्ति है जो अरब समाजों पर वर्चस्व और उन्हें विखंडित करने का प्रयास करती है।
अल-रिफाई ने आगे लिखा: यह आंकड़ा न केवल यह बताता है कि सीरियाई लोगों की नजर में इज़राइल एक स्पष्ट और संरचित दुश्मन है, बल्कि यह भी कहता है कि सीरियाई लोगों की सार्वजनिक चेतना में इज़राइल एक ऐसा खिलाड़ी है जो सीधे बमबारी और हत्या से लेकर अलगाववादी प्रवृत्तियों को हवा देने तक विभिन्न उपकरणों और तरीकों से सीरिया के आंतरिक माहौल को अस्थिर करने में भूमिका निभाता है, इसका मतलब यह है कि इज़राइल का खतरा न केवल एक सीमा पार का खतरा है, बल्कि सरकार और समाज स्तर पर सीरिया की स्थिरता के लिए भी एक खतरा है और यह सुरक्षा समझौता सीरियाई समाज में इज़राइल की छवि नहीं बदलेगा।
इस खेल का मंच सीरिया के द्रुज समुदाय का केंद्र अल-सुवैदा शहर है। यूरोन्यूज़ ने एक रिपोर्ट में लिखा: अल-सुवैदा शहर पिछली गर्मियों में हुए संघर्षों के बाद, व्यावहारिक रूप से खुद को दमिश्क की संप्रभुता से अलग कर चुका है। उन झड़पों में, इज़राइल ने जॉलानी प्रशासन के बलों पर हमला करके खुद को द्रुज समुदाय का समर्थक बताया। यूरोन्यूज़ ने लिखा कि आज, अल-सुवैदा की सड़कों पर इज़राइली झंडे दिखाई देते हैं और इज़राइल के करीबी एक व्यक्ति की अगुवाई वाली 'सुप्रीम लीगल कमेटी' और उसकी सैन्य शाखा इस शहर के मामलों का प्रबंधन कर रही है। इस कार्रवाई के साथ, इज़राइल ने सीरिया की गहराई में एक प्रभाव का आधार बनाया है और द्रुज समुदाय की स्वायत्तता की इच्छा को सीरियाई शासन को कमजोर करने के लिए एक उत्तोलक में बदल दिया है, जिसका परिणाम सीरिया के बहुसंख्यक लोगों के बीच अविश्वास को गहरा करना है।
यूरोन्यूज़ ने लिखा: दक्षिणी सीरिया की वर्तमान स्थिति एक नाजुक शांति का चित्र प्रस्तुत करती है। अल-सुवैदा एक अर्ध-स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में प्रशासित होता है, जिसकी वैधता को दमिश्क द्वारा मान्यता नहीं दी गई है। इज़राइल के दक्षिणी सीरिया की सीमाओं पर बार-बार सैन्य हमले जारी हैं और जॉलानी प्रशासन भी अल-सुवैदा की खोई हुई शांति में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सका है। इस बीच, इज़राइल की भूमिका एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में जो कठिन सैन्य उपकरणों और नरम प्रभाव के उत्तोलक दोनों का उपयोग करता है, पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। सीरिया के कुछ क्षेत्रों में इज़राइल की उपस्थिति का परिणाम एक गहरी अस्थिरता की निरंतरता है जो इस देश की भविष्य की स्थिरता को खतरे में डालती है। (AK)
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