लेबनानी प्रतिनिधि: "'रूपरेखा समझौता' अमान्य और अवैध है"
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पार्स टुडे – लेबनानी संसद में 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य ने इस देश के अधिकारियों द्वारा ज़ायोनी शासन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए जोर देकर कहा कि 'रूपरेखा समझौता' अमान्य और अवैध है।
(last modified 2026-07-01T12:18:51+00:00 )
Jul ०१, २०२६ १७:४७ Asia/Kolkata
  • लेबनानी संसद के सदस्य और 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य इब्राहीम अल-मूसवी
    लेबनानी संसद के सदस्य और 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य इब्राहीम अल-मूसवी

पार्स टुडे – लेबनानी संसद में 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य ने इस देश के अधिकारियों द्वारा ज़ायोनी शासन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए जोर देकर कहा कि 'रूपरेखा समझौता' अमान्य और अवैध है।

पार्स टुडे के अनुसार लेबनानी संसद के सदस्य और 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य 'इब्राहीम अल-मूसवी' ने कहा:

"लेबनानी अधिकारियों ने प्रतिरोध समुदाय के साहस, धैर्य और दृढ़ता तथा योद्धाओं की वीरता के सामने, कृतघ्नता दिखाई है और उनके बलिदानों का जवाब, स्वयं को सस्ते में बेचकर, अमेरिकी तानाशाही के आगे आत्मसमर्पण करके और ज़ायोनी परियोजना की सेवा करके दिया है। यह घटना उस समय हुई जब इस्लामिक गणराज्य ईरान ने लेबनान के हितों की रक्षा करने युद्धविराम स्थापित करने और इज़राइली दुश्मन को लेबनानी क्षेत्र से पीछे हटाने के लिए कार्रवाई की।"

 

अल-मूसवी ने जोर देकर कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान अपनी स्थिति पर दृढ़ और अटल है।

 

इस लेबनानी प्रतिनिधि ने कहा:

"'रूपरेखा समझौता' अपमान, शर्म, अधीनता और आत्मसमर्पण का समझौता है, यह समझौता अमान्य और अवैध है क्योंकि यह अवैध रूप से उत्पन्न हुआ है और संविधान तथा राष्ट्रीय वाच का उल्लंघन करता है।" mm