विश्लेषण | इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य वापसी
पार्सटुडे – अमेरिकी सेना ने इराक़ से विशेष रूप से इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र में अरबील हवाई अड्डे के पास तैनात अपनी शेष सेनाओं को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। पैट्रियट रक्षा प्रणालियाँ भी इस क्षेत्र से हटा ली गई हैं।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार अरबील से अमेरिकी सेनाओं को हटाना जो पैट्रियट रक्षा प्रणालियों को हटाने के साथ हुआ है, इराक़ से अमेरिकी सैन्य कर्मियों की पूर्ण वापसी की 30 सितंबर की समय-सीमा के साथ ही हो रहा है। इस वापसी के कारणों और आयामों को समझना विशेष रूप से ईरान द्वारा इस क्षेत्र पर व्यापक हमलों को देखते हुए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस वापसी के पर्दे के पीछे कई कारण हैं:
1. इराक़ और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय समझौते का कार्यान्वयन:
सबसे महत्वपूर्ण और आधिकारिक कारण 2024 में बगदाद और वाशिंगटन के बीच हस्ताक्षरित समझौते का क्रियान्वयन है। इस समझौते के अनुसार इराक़ में दाएश (आईएसआईएस) के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का सैन्य मिशन 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो जाएगा और उसका स्थान द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग ले लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक़ी प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी के साथ जुलाई 2026 में इस समय-सीमा पर ज़ोर दिया। ट्रंप ने सैन्य आवश्यकता में कमी का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका अब इराक़ में सैन्य बल की उपस्थिति को आवश्यक नहीं मानता है और दोनों देशों के संबंध अधिकतर आर्थिक धुरी पर केंद्रित होंगे।
2. ईरानी हमलों का दबाव और रक्षा प्रणालियों की कमज़ोरी:
हालाँकि यह वापसी समझौते के अनुसार नियोजित थी लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र में विघटनवादी कुर्द समूहों पर ईरानी हमलों की तीव्रता और अमेरिकी प्रतिष्ठानों व सेनाओं को निशाना बनाए जाने ने इस प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है। 28 फ़रवरी 2026 से जब अमेरिका और ज़ायोनी शासन ने ईरान के ख़िलाफ़ अपना सैन्य आक्रमण शुरू किया इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र लगभग एक हज़ार मिसाइलों और ड्रोनों का निशाना बन चुका है जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादी समूहों और पश्चिमी सैन्य कर्मियों के दर्जनों सदस्य मारे गए हैं और 150 से अधिक अन्य घायल हुए हैं।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार जिनमें प्रेस टीवी वेबसाइट भी शामिल है, अरबील में पैट्रियट प्रणालियों पर ईरान के सटीक हमलों ने इन प्रणालियों को नष्ट कर दिया है। पैट्रियट्स पर सीधे हमला होना, एक महत्वपूर्ण सैन्य घटनाक्रम माना जाता है और यह दिखाता है कि ये प्रणालियाँ न केवल अमेरिकी सैन्य बलों और प्रतिष्ठानों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थ रहीं बल्कि स्वयं ईरान के लिए एक रणनीतिक लक्ष्य बन गईं। इस वास्तविकता का वाशिंगटन के उपकरणों और बलों को हटाने के निर्णय पर प्रभाव पड़ा है।
3. रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन और अन्य बिंदुओं को प्राथमिकता देना:
पैट्रियट मिसाइलों की कमी को देखते हुए, वाशिंगटन संभवतः इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि अरबील में 'हरीर' हवाई अड्डे की सुरक्षा, फार्स की खाड़ी और जॉर्डन के तटवर्ती देशों में अपने ठिकानों की तुलना में कम प्राथमिकता रखती है। इस संदर्भ में एक जानकार स्रोत ने कहा है: "इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र प्राथमिकता नहीं है; फार्स की खाड़ी और जॉर्डन स्पष्ट रूप से प्राथमिकता रखते हैं।" यह क्षेत्र में रक्षा संसाधनों के आवंटन में एक रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है।
अमेरिकी बलों और पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियों की वापसी, इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र के हवाई सुरक्षा को बहुत कमज़ोर करती है। पैट्रियट और ब्रिटिश 'रैपिड सेंट्री' प्रणालियाँ, जो लगभग 75% मिसाइल और ड्रोन हमलों का पता लगाती थीं, इस क्षेत्र से हटा दी गई हैं और उनके स्थान पर केवल सीमित C-RAM प्रणालियाँ ही बची हैं। इन प्रणालियों की अनुपस्थिति में इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र में आतंकवादी समूहों के ठिकाने ईरान के भविष्य के हमलों के सामने अधिक कमज़ोर हो जाएंगे।
इराक़ी कुर्दिस्तान से अमेरिकी वापसी, आधिकारिक कारकों और वास्तविक कारकों का परिणाम है। हालाँकि समझौते का ढाँचा मौजूद था लेकिन ईरान के अभूतपूर्व हमलों और उन्नत रक्षा प्रणालियों की कमज़ोरी ने दिखाया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को जारी रखना बढ़ती लागतों और रणनीतिक जोखिमों के साथ है। यह बात दर्शाती है कि तथाकथित सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अमेरिका पर निर्भरता कितनी नाजुक और अस्थिर है। mm