बहरैनी अधिकारियों की दमनकारी नीति पर हिज़्बुल्लाह की प्रतिक्रिया
हिज़्बुल्लाह ने बहरैन में राजनैतिक दलों के ख़िलाफ़ आले ख़लीफ़ा शासन की दमनकारी नीति की निंदा की है।
इर्ना के अनुसार, लेबनान के जनप्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह ने एक बयान में कहा कि बहरैन सरकार की इस देश के सबसे बड़े दल अलवेफ़ाक़ राष्ट्रीय दल के कार्यालय को बंद करने और तौइया व रेसालतुल इस्लामिया राजनैतिक दलों को भंग करने की दमनकारी नीति निंदनीय है। इस बयान में आगे आया है कि ये कार्यवाही बहरैनी शासन की अत्याचारी प्रवृत्ति की सूचक और उन अधिकारों व आज़ादी पर अतिक्रमण है जिससे दुनिया के सभी राष्ट्र संपन्न हैं।
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन ने कहा कि जिन दलों को भंग किया गया है वे चरमंपथी विचारधारा व हिंसा के समर्थक दल नहीं हैं बल्कि इन दलों के नेताओं ने अपने भाषणों, गतिविधियों व विचारों के ज़रिए शांति व सुरक्षा का समर्थन किया है। इन दलों की कोशिश रही है कि बहरैनी समाज को कोई नुक़सान न पहुंचे।
हिज़्बुल्लाह के बयान में आया है कि हिज़्बुल्लाह, बहरैन के शांतिप्रेमी व प्रतिरोधी राष्ट्र के सामने अपनी बेहतरीन उपलब्धियों को पेश करता है कि एक राष्ट्र ने दुनिया को यह सिखाया कि किस तरह जनसंहार व अत्याचार का दृढ़ता से मुक़ाबला करना चाहिए।
ज्ञात रहे बहरैनी शासन ने इस देश के राष्ट्रीय अलवेफ़ाक़ दल को इस बहाने से जिसे वह आतंकवादी गतिविधियां कहता है, भंग करके इसके कार्यालयों को सील कर दिया है। बहरैन में सत्ताधारी आले ख़लीफ़ा परिवार के ख़िलाफ़ फ़रवरी 2011 से शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है।
आले ख़लीफ़ा शासन, विरोधियों की भविष्य निर्धारण के अधिकार की मांग का, हिंसा के ज़रिए जवाब देता है। (MAQ/N)