बहरैन में जारी दमन के बीच 4 शिया धर्मगुरुओं की गिरफ़्तारी
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बहरैनी शिया धर्मगुरु शैख़ ईसा मोमिन
बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन की इस देश के बहुसंख्यक समुदाय की मशहूर हस्तियों के ख़िलाफ़ जारी दमनकारी नीति के क्रम में बहरैनी पुलिस ने 4 शिया धर्मगुरुओं को गिरफ़्तार किया है।
बहरैन से प्रकाशित अरबी भाषी अख़बार ‘मिरअतुल बहरैन’ के अनुसार, शैख़ ईसा मोमिन को जो राजधानी मनामा के पूरब में स्थित दइर गांव में जुमे की नमाज़ के इमाम हैं, शनिवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इस रिपोर्ट के अनुसार, बहरैनी पुलिस ने इसी प्रकार पूर्वी मनामा में धर्मगुरुओं शैख़ अली अलहामेली, शैख़ फ़ाज़िल ज़की और सय्यद मोहसिन ग़रीफ़ी को भी हिरासत में ले लिया है।
ज्ञात रहे पिछले महीने बहरैनी शासन के सुरक्षा कर्मियों ने बहरैन की इस्लामी स्कॉलर काउंसिल के सचिव सय्यद माजिद अलमशअल के घर पर छापा मार कर उन्हें हिरासत में ले लिया था।
इस काउंसिल की स्थापना वरिष्ठ शिया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की अध्यक्षता में 2004 में हुयी थी।
शैख़ ईसा क़ासिम बहरैन के सबसे बड़े विपक्षी दल अलवेफ़ाक़ के धार्मिक गुरु भी हैं। अलवेफ़ाक़ दल को अभी हाल में आले ख़लीफ़ा शासन ने भंग कर दिया।
बहरैनी शासन ने इसी प्रकार शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता, उन पर यह इल्ज़ाम लगाकर कि वह बहरैन में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ रहे हैं, रद्द कर दी है। शैख़ ईसा क़ासिम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप को कड़ाई से ख़ारिज किया है।
ज्ञात रहे बहरैनी शासन की विरोधी स्वर को दबाने के लिए दमनकारी नीति की, देश के भीतर और बाहर बड़ी आलोचना हो रही है।
हालिया हफ़्तों में दिराज़ गांव में शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में जनता ने धरना प्रदर्शन किए।
इसी क्रम में शनिवार की रात फिर दिराज़ में प्रदर्शन हुआ जिसके दौरान जनता ने सत्ताधारी आले ख़लीफ़ा शासन के अत्याचार के ख़िलाफ़ नारे लगाए। (MAQ/N)