न्यूयार्क में तथाकथित फ़्रेंड्ज़ आॅफ़ सीरिया बैठक
संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के 71वें अधिवेशन के अवसर पर न्यूयार्क में तथाकथित फ़्रेंड्ज़ आॅफ़ सीरिया की बैठक तनावपूर्ण वातावरण में आयोजित हुई लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकला।
सीरिया में एक सप्ताह तक चलने वाले संघर्ष विराम की समाप्ति के बाद यह बैठक अमरीका व रूस के विदेश मंत्रियों जाॅन केरी और सेर्गेई लावरोफ़ की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक से निकलने पर जाॅन केरी ने पत्रकारों से बात करते हुए इतना ही कहा कि संघर्ष विराम मरा नहीं है। फ़्रान्स के विदेश मंत्री जाॅन मार्क एरो ने भी कहा कि फ़्रेंड्ज़ आॅफ़ सीरिया यह बैठक तनावपूर्ण थी। सीरिया के मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिनिधि स्टीफ़न दिमिस्तूरा ने भी जाॅन केरी के बयान को दोहराते हुए कहा कि अभी युद्ध विराम मरा नहीं है।
अमरीका व रूस के विदेश मंत्री एक दूसरे पर संघर्ष विराम के सफल न होने का आरोप लगा रहे हैं। अमरीकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि न्यूयार्क में फ़्रेंड्ज़ आॅफ़ सीरिया की बैठक में भाग लेने वाले इस बात पर सहमत थे कि हिंसा व अशांति जारी रहने के बावजूद, पूरे सीरिया में संघर्ष विराम लागू किया जाना ज़रूरी है। सीरिया का संकट छठे साल में प्रविष्ट हो चुका है और इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि विश्व समुदाय विशेष कर अमरीका इसे समाप्त करने में विफल रहा है। इसका कारण यह है कि आतंकवाद के संबंध में कोई एकमत नीति नहीं है। इस परिस्थिति में जो भी पहल की जाए वह विफल रहेगी। अमरीका ने यह दिखाने की बड़ी कोशिश की है कि वह सीरिया संकट के समाधान में गंभीर है लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।
अमरीका ने तथाकथित मध्यमार्गी सरकार विरोधियों का हर संभव समर्थन किया है क्योंकि वाॅशिंग्टन और आतंकियों दोनों ही का लक्ष्य एक है। दोनों ही बश्शार असद की सरकार को गिराना चाहते हैं। एक सप्ताह के संघर्ष विराम में सीरियाई सेना के ठिकानों पर हमला, सहायताकर्मियों के कारवां पर हमला और आतंकियों की स्थिति को मज़बूत बनाना एेसी बातें हैं जिनसे सिद्ध होता है कि सीरिया में अमरीका व आतंकियों का लक्ष्य एक ही है। (HN)