इराक़ में सद्दाम की बास पार्टी पर रोक
इराक़ी राष्ट्रपति फ़ोआद मासूम ने बुधवार को एक आदेश के ज़रिए सद्दाम की बास पार्टी पर हर प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने और आतंकवाद से निपटने के क़ानून के लागू होने का एलान किया।
इराक़ी राष्ट्रपति के मीडिया कार्यालय से जारी बयान में आया है कि यह क़ानून बास पार्टी के किसी भी नाम से सत्ता या राजनैतिक मंच पर लौटने की कोशिश पर रोक लगाता है और उन राजनैतिक दलों की गतिविधियों के भी ख़िलाफ़ है, जो प्रजातांत्रिक और शांतिपूर्ण राजनैतिक गतिविधियों के सिद्धांत को नहीं मानते।
इराक़ी राष्ट्रपति का यह क़दम इराक़ में राजनैतिक व्यवस्था और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क़ानून बास पार्टी के अत्याचारों के ख़िलाफ़ न्यायपूर्ण कार्यवाही के समान है। बास पार्टी ने इराक़ के पूर्व तानाशाह सद्दाम के काल में मानवता के ख़िलाफ़ बहुत से जघन्य अपराध किए। इन अपराधों की काली सूचि बहुत लंबी है इसलिए सबका उल्लेख नहीं किया जा सकता। केवल 1988 और 1989 में सद्दाम के आदेश से इराक़ी कुर्दों का जनसंहार ही, बास पार्टी के जघन्य अपराध के चरम को मिसाल के तौर पर पेश करने के लिए काफ़ी है।
सद्दाम के आदेश से इन्फ़ाल नामक कार्यवाही के तहत बास पार्टी के तत्वों ने कुर्दों का जनसंहार किया था।
बास शासन की ओर से राजनीति व सुरक्षा के क्षेत्र में दमन को इराक़ के इतिहास में स्पष्ट तौर देखा जा सकता है। हलांकि सद्दाम का तानाशाही शासन ख़त्म हो चुका है किन्तु इराक़ के मौजूदा हालात उन्हीं ज़ख़्मों की याद दिलाते हैं। भंग हो चुकी बास पार्टी की इराक़ में दाइश के साथ सहयोग के रूप में नई गतिविधियां, पहले से ज़्यादा इराक़ी जनता को पीड़ा पहुंचा रही हैं।
इराक़ में जनता द्वारा चुनी गयी सरकार के सत्ता में आते ही बासी तत्व इराक़ की एकता व संप्रभुता को नुक़सान पहुंचाने में लिप्त रहे हैं। बास पार्टी के बचे हुए तत्वों की ओर से इन ख़तरों के मद्देनज़र, इराक़ के नए राजनैतिक ढांचे के तहत विभिन्न संगठनों से बासियों को निकाल बाहर करना इराक़ी जनता की इस देश की सरकार से मांग रही है। यह वह मांग है जिसे इराक़ी अधिकारी पूरा करने का इरादा रखते हैं।(MAQ/T)