सुरक्षा परिषद की ओर से इस्राईल की मौखिक निंदा
संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद ने एक अनौपचारिक बैठक में ज़ायोनी शासन द्वारा फ़िलिस्तीनियों की भूमियों में कालोनी निर्माण को ग़ैर क़ानूनी बताया है।
यह बैठक अंगोला, मलेशिया, वेनेज़ोएला, सेनेगाल, मिस्र और फ़िलिस्तीन के प्रतिनिध की मांग पर आयोजित की गई जिसका उद्देश्य, इस्राईल की ग़ैर क़ानूनी कालोनी निर्माण की निंदा करना था।
इस बैठक में अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में अमरीका के प्रतिनिधि ने कहा कि फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में कालोनियों का निर्माण, शांति प्रक्रिया को क्षति पहुंचाने वाला है।
इस अनौपचारिक बैठक में फ़्रांस के प्रतिनिधि ने कहा कि इस्राईल की कालोनी निर्माण की नीति, इस्राईल तथा फ़िलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ने का कारण है। फ़िलिस्तीनियों के घरों को व्यापक स्तर पर तोड़ने और उन क्षेत्रों में कालोनी निर्माण का कार्य, वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। बहुत से टीकाकार इसे इस्राईल की वर्चस्ववादी एवं अतिक्रमणकारी नीति का नाम दे रहे हैं।
जहां एक ओर राष्ट्रसंघ की अनौपचारिक बैठक में अमरीका के प्रतिनिधि ने मौखिक रूप में इस्राईल के कालोनी निर्माण की निंदा की है वहीं पर सूत्रों का कहना है कि इस बात के पुष्ट प्रमाण मौजूद हैं कि फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में बनाई जाने वाली ज़ायोनी कालोनी के निर्माण कार्य में अमरीका भी भागीदार है। इस बारे में इस्राईल रेडियो ने अभी हाल में यह बात कही थी कि फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में कालोनी निर्माण का कारण अमरीकी सहायता और उसके नेतृत्व में हो रहा है। यह बातें सिद्ध करती हैं कि फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल के अपराधों में अमरीका भी सहभागी है।
यह सबकुछ एेसी स्थिति में है कि जब अमरीका ने सुरक्षा परिषद में इस्राईल के विरुद्ध बहुत से प्रस्तावों को वीटो किया है। आंकड़ों से पता चलता है कि अमरीका ने अबतक 80 बार अपने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया है जिसमें 43 बार इस्राईल के समर्थन में वीटो के अधिकार का प्रयोग किया गया।
इससे पता चलता है कि फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इस्राईल द्वारा कालोनी निर्माण कार्य की अमरीका और पश्चिम की ओर से भर्त्सना, केवल विश्व जनमत को दिगभ्रमित करने के लिए है।