आले सऊद शासन की ज़ायोनी शासन से हथियारों की ख़रीदारी
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इस बात की ख़बरे सामने आयी हैं कि सऊदी अरब ने ज़ायोनी शासन से हथियारों की ख़रीदारी की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २२, २०१६ १४:१० Asia/Kolkata

इस बात की ख़बरे सामने आयी हैं कि सऊदी अरब ने ज़ायोनी शासन से हथियारों की ख़रीदारी की है।

सोशल मीडिया में सक्रिय व बहुचर्चित राजनैतिक कार्यकर्ता मुजतहिद ने अपने ट्वीटर पेज यह ख़बर प्रकाशित की कि दक्षिण अफ़्रीक़ा की मध्यस्थता से सऊदी अरब ने ज़ायोनी शासन से कई ड्रोन विमान ख़रीदे। मुजतहिद ने सऊदी अरब के उन आधिकारिक स्रोतों की ख़बरों को धूर्ततापूर्ण बताया जिसमें कहा गया है कि दक्षिण अफ़्रीक़ा में सऊदी अरब ड्रोन विमानों का कारख़ाना लगा रहा है। मुजतहित ने कहा कि सऊदी अरब इस तरह की ख़बरों के ज़रिए इस सच्चाई को छिपाना चाहता है कि उसने ज़ायोनी शासन से 40 करोड़ डॉलर के ड्रोन विमान ख़रीदे हैं। ये ड्रोन विमान दक्षिण अफ़्रीक़ा से स्पेयरपार्ट्स के रूप में सऊदी अरब पहुंचाए गए हैं जहां उन्हें असेंबल किया जाएगा।

आले सऊद और ज़ायोनी शासन के बीच संबंधों के नए आयाम से पर्दा ऐसी हालत में उठा है कि सऊदी अरब के पूर्व गुप्तचर अधिकारी अनवर इश्क़ी ने हालिया महीनों में कई बार विभिन्न देशों और ख़ुद अतिग्रहित फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी अधिकारियों से मुलाक़ात की है। अनवर इश्क़ी को सऊद-ज़ायोनी संबंधों को धीरे-धीरे ज़ाहिर करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।

इस बात में शक नहीं रहना चाहिए कि सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन के बीच हालिया दिनों में सैन्य सहयोग की नई ख़बरों से पर्दा हटना दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से जारी सहयोग का एक छोटा सा आयाम है।

सऊदी अरब, ज़ायोनी शासन और पश्चिमी सरकारों के बीच सैन्य क्षेत्र के नतीजे में क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संकट पैदा होने के सिवा कोई और नतीजा नहीं रहा है। हालिया वर्षों में बुराइयों की धुरी समझे जाने वाले अमरीकी गुप्तचर संगठन सीआईए, ज़ायोनी जासूसी संगठन मोसाद और सऊदी सुरक्षा संगठन के दिशानिर्देश से वजूद में आए आतंकवादी गुट दाइश, इसी दुष्ट सहयोग का नतीजा है। (MAQ/T)