इस्राईल के रवैये की संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से आलोचना
इस्राईल के रवैये की संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से आलोचना
फ़िलिस्तीन की भूमि में मानवाधिकार मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिनिधि माइकल लिंक ने कहा है कि इस्राईल मानवाधिकार के समर्थक गुटों की गतिविधियों के मार्ग में रुकावट पैदा कर रहा है।
माइकल लिंक ने शुक्रवार को कहा कि मानवाधिकार के उल्लंघन के संबंध में इस्राइली सरकार की कार्यवाहियों की जांच होनी चाहिए।
हालिया वर्षों में अतिग्रहित भूमि में मानवाधिकार के समर्थक गुटों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के अमानवीय रवैये के बारे में अनेक रिपोर्टें प्रकाशित हो चुकी हैं।
क़ानूनी हल्क़ों का कहना है कि फ़िलिस्तीन की भूमि में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिवेदक के प्रवेश पर रोक लगाकर इस्राईल ने अपनी क़ानून विरोधी प्रवृत्ति का नमूना पेश किया है। ज़ायोनी शासन अंतर्राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार में किसी सीमा को नहीं मानता। जैसा कि 2010 में ज़ायोनी सैनिकों ने ग़ज़्ज़ा की आज़ादी नामक समुद्री कारवां पर आज़ाद जलक्षेत्र में हमला किया था, जिसमें 9 कार्यकर्ता हताहत और 60 अन्य घायल हुए थे।
अभी हाल में इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा की नाकाबंदी को समुद्री जहाज़ से तोड़ने की कोशिश करने वाले कार्यकर्ताओं को निकाल कर, कि जिसमें शांति का नोबल पुरस्कार पाने वाली मायरीड मैग्गवायर भी थीं, इस वास्तविकता को पहले से ज़्यादा स्पष्ट कर दिया कि वह शांति कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ किसी भी अपमानजनक कार्यवाही में संकोच नहीं करेगा। ज़ायोनी शासन के बढ़ते अपमानजनक व्यवहार पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने आपत्ति जतायी थी।
बहरहाल मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ इस्राईल के दुर्व्यवहार की जांच में अंतर्राष्ट्रीय हल्क़ों की ओर से टाल मटोल ऐसी कमज़ोरी है जो इस प्रकार के व्यवहार के जारी रहने में प्रभावी रही है। ऐसे व्यवहार ने ज़ायोनी शासन के लिए एक तरह से सुरक्षा दीवार बना दी है और इस स्थिति के जारी रहने के कारण इस्राईल निश्चिंत होकर अपने अपराध जारी रखे हुए है। (MAQ/T)