अमरीका और सऊदी अरब के हथियार कैसे लगे दाइश के हाथ?
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इराक़ के शहर मूसिल में काफ़ी समय से एक जांच हो रही थी जिसका लक्ष्य यह पता लगाना था कि आतंकी गुटों के हाथ इतनी बड़ी संख्या में हथियार कैसे लगे?
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Nov २४, २०१६ १८:२९ Asia/Kolkata
  • अमरीका और सऊदी अरब के हथियार कैसे लगे दाइश के हाथ?

इराक़ के शहर मूसिल में काफ़ी समय से एक जांच हो रही थी जिसका लक्ष्य यह पता लगाना था कि आतंकी गुटों के हाथ इतनी बड़ी संख्या में हथियार कैसे लगे?

इस जांच टीम के प्रमुख जेम्स बॉन का कहना था कि आज तक विश्व समुदाय इस वास्तविकता से आंखें बंद किए हुए थी कि यह हथियार युद्धग्रस्त क्षेत्रों में कैसे पहुंचे। इस जांच टीम ने उन क्षेत्रों में जांच आरंभ की जो दाइश के नियंत्रण से स्वतंत्र हुए हैं।

टीम के अनुसार, बमों और गोलों पर लगे लेबल से इसकी वास्तविकता का पता चलता है किन्तु विस्फोटक पदार्थों की ख़ाली थैलियां अधिक उपयोगी हैं। इन थैलियों पर इनके उत्पादन की तिथि और सिरियल नंबर पड़े हुए हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है।  इस जांच टीम ने जो सूचनाएं एकत्रित की हैं उनसे पता चलता है कि जांच का मैदान बहुत व्यापक है।

इस जांच टीम ने इस बात की समीक्षा की कि किस प्रकार यह हथियार और गोले बारूद कारख़ानों से युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचे। प्रमाणों से पता चलता है कि दाइश अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हथियारों के उत्पादन की बहुत अधिक कोशिश की है और इन क्षेत्रों में हैंड ग्रेनेड बनाने के केन्द्र बनाए हैं किन्तु कुछ हथियार और गोलाबारूद ऐसे थे जो इराक़ से बाहर से लाए गये थे।

इन हथियारों में बड़ी संख्या रसायनिक हथियारों की है। यह पदार्थ तुर्की के बाज़ारों में बेचे जाते थे और अब मूसिल में दाइश के हाथों यह पदार्थ लग चुके हैं और वह भी बड़ी मात्रा में।

मूसिल की जांच टीम के प्रमुख का कहना है कि इस नेटवर्क का दक्षिणी तुर्की में काफ़ी प्रभाव है। इस आतंकी गुट के इन पदार्थों के तस्करों के साथ घनिष्ठ व गुप्त संबंध हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि दाइश को अपने लड़ाकों को सशस्त्र करने और विभिन्न प्रकार के हथियारों से उन्हें लैस करने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं है, इन हथियारों की बड़ी मात्रा युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भेजी गयी हैं वह भी उन लोगों के द्वारा जो दाइश से मुक़ाबला कर रहे हैं।  (AK)