अमरीकी गठबंधन के हमलों का शिकार आम सीरियन नागरिक
आतंकवाद के विरुद्ध बने अमरीकी गठबंधन के हमलों का शिकार आम सीरियन नागरिक हो रहे हैं।
जहां एक ओर सीरिया में सक्रिय आतंकवादी गुटों की हिंसक कार्यवाहियों में इस देश के नागरिक मारे जा रहे हैं वहीं पर रक़्क़ा में शरणार्थियों पर अमरीकी गठबंधन के हवाई हमलों में दसियों आम लोग मारे गए हैं। 24 नवंबर को सीरिया की राजधानी दमिश्क़ के निकटवर्ती क्षेत्रों में जैशुल इस्लाम नामक आतंकवादी गुट के आक्रमण में सीरिया के 7 नागरिक मारे गए थे जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इसी बीच रक़्क़ा में अमरीकी गठबंधन के हमले में कम से कम 10 लोग मारे गए और बड़ी संख्या में घायल हुए।
वर्तमान समय में सीरिया, जहां पर विभिन्न आतंकवादी गुटों की अतिवादी कार्यवाहियों का केन्द्र बना हुआ है वहीं यह देश, मध्यपूर्व में प्रतिरोध के केन्द्र के रूप में सऊदी अरब और उसके घटक देशों की दुष्टता का साक्षी है। सीरियावासी इससे पहले भी कई बार अमरीकी गठबंधन के हवाई हमलों का लक्ष्य बनते रहे हैं जिन्हें बाद में चूक या ग़लती घोषित किया गया किंतु इसके परिणाम स्वरूप आम लोग ही मारे गए। हालांकि आतंकवाद के विरुद्ध बनाए गए गए गठबंधन का उद्देश्य, आतंकवादियों का सफाया करना था न कि आम जनता पर हमले करना। वास्तविकता यह है कि आतंकवाद के विरुद्ध बनाए गए गठबंधन को सीरिया की सरकार के साथ समन्वय बनाकर अपनी कार्यवाहियां करनी चाहिए जबकि हो उसके विपरीत रहा है। यह तथाकथित गठबंधन अगस्त 2014 से सीरिया में स्वेच्छा से कार्यवाहिंया करता आ रहा है जिससे सबसे अधिक क्षति, सीरिया की जनता को उठानी पड़ी है।
टीकाकारों का कहना है कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में सीरिया को इराक़ जैसा आदर्श बनाना होगा जिसमें देश की सेना स्वयंसेवियों के साथ मिलकर सरकार के समन्वय से अभियान जारी रखे। यदि सीरिया में यह नीति अपनाई जाती है तो आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में इसके अच्छे परिणाम आ सकते हैं। ठीक उसी प्रकार से जिस प्रकार इराक़ में आतंकवाद के विरुद्ध सेना और स्वंयसेवक बलों के संयुक्त अभियान की उल्लेखनीय उपलब्धियां विश्व के सामने आ रही हैं।