जायोनियों ने आग लगने का आरोप फिलिस्तीनियों पर मढ़ा
एक जायोनी धर्मगुरू ने भी दावा किया है कि जायोनी क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनी इसके ज़िम्मेदार हैं और उसने फिलिस्तीनियों की हत्या की मांग की है।
अवैध अधिकृत फिलिस्तीन में संदिग्ध रूप से आग लगने के बाद फिलिस्तीन विरोधी जायोनी धर्मगुरू के दृष्टिकोण इस बात के सूचक हैं कि जायोनी शासन के अधिकारी इस विषय से राजनीतिक लाभ उठाने और अधिक फिलिस्तीनियों की हत्या के प्रयास में हैं जबकि अभी यह ज्ञात नहीं हो सका है कि अवैध अधिकृत फिलिस्तीन में आग लगने का कारण क्या है पर इस्राईली अधिकारी आग लगने के आरंभ से ही कह रहे हैं कि यह आग जानबूझ कर लगाई गयी है और इसके लिए उन्होंने फिलिस्तीनियों को जिम्मेदार बताया है।
इस संबंध में एक जायोनी धर्मगुरू ने भी दावा किया है कि जायोनी क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनी इसके ज़िम्मेदार हैं और उसने फिलिस्तीनियों की हत्या की मांग की है। जायोनी धर्मगुरू इस्माईल अलयाहू ने 25 नवंबर को घोषणा की है कि फिलिस्तीनियों को जला देना एक अनिवार्य दायित्व है और समय पड़ने पर उन्हें गोली मार देना चाहिये।
इसी प्रकार इस जायोनी धर्मगुरू ने बल देकर कहा कि उसके दावे के अनुसार अगर इस्राईली सैनिक आग लगाने के ज़िम्मेदार फिलिस्तीनियों की ओर से फायरिंग करते तो किसी भी स्थिति में हैफा और दूसरे क्षेत्रों में आग न लगती।
जायोनी शासन ने भी कहा है कि अवैध अधिकृत फिलिस्तीन में जानबूझ फिलिस्तीनियों ने आग लगाई है। जायोनी गुप्तचर सेवा मूसाद ने भी आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि जानबूझ कर आग लगाई गयी है और इस संबंध में उसने कुछ फिलिस्तीनी युवाओं को गिरफ्तार किये जाने की सूचना दी है।
जायोनी शासन की ओर से ऐसी स्थिति में यह कहा जा रहा है कि फिलिस्तीनियों ने आग लगाई है जब फिलिस्तीनियों ने जायोनी शासन से संघर्ष के पूरे इतिहास में कभी भी इस शैली का प्रयोग नहीं किया है बल्कि यह जायोनी हैं जिन्होंने फिलिस्तीनियों के विरुद्ध यहां तक कि धार्मिक स्थलों में भी आग लगाई है।
वर्ष 1969 में जायोनियों की ओर से मस्जिदुल अक्सा में आग लगाये जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM