सैन्य अभ्यास, फ़िलिस्तीनियों को उनकी ज़मीनों से निकालने की इस्राईली साज़िश
ज़ायोनी शासन ने सोमवार को पश्चिमी तट के अलअग़वार इलाक़े से फ़िलिस्तीनियों को क्षेत्र छोड़कर जाने पर विवश करने के लिए सैन्य अभ्यास शुरू किया है। हालिया कुछ हफ़्तों से ज़ायोनी शासन ने फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में सैन्य अभ्यास बढ़ा दिया है।
फ़िलिस्तीनियों का कहना है कि ज़ायोनी शासन का मुख्य लक्ष्य फ़िलिस्तीनियों को घरबार छोड़कर जाने पर विवश करना है। ज़ायोनी शासन की योजना यह है कि और अधिक फ़िलिस्तीनी भूमियों पर ज़ायोनी कालोनियों का निर्माण किया जाए। इस्राईल फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर अपना क़ब्ज़ा मज़बूत करने के लिए वहां ज़योनियों को बसा रहा है। इस्राईल की इस रणनीति के नतीजे में लगातार फ़िलिस्तीनी परिवार बेघर हो रहे हैं।
यह ख़बरें बार बार आ रही हैं कि ज़ायोनी शासन पश्चिमी तट के क्षेत्र को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने की चेष्टा में है। हालांकि ज़ायोनी शासन को अपनी इस नीति के चलते विश्व स्तर पर आलोचनाओं का सामना है। स्वेडन जैसे देशों ने ज़ायोनी शासन की विस्तारवादी कार्यवाहियों का खुलकर विरोध किया है। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी ज़ायोनी शासन को विरोध का सामना करना पड़ा है। लैटिन अमेरिकी देशों ने भी ज़ायोनी शासन के विरोध में आवाज़ उठाई है। लेकिन इस बीच यह भी सच्चाई है कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस संदर्भ में अपने दायित्वों का पालन नहीं कर रही हैं जिसका कारण इन संस्थाओं पर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस जैसे देशों का गहरा प्रभाव है। इस कारण इन संस्थाओं की साख भी प्रभावित हुई है और यह विचार आम हुआ है कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं स्वाधीन नहीं हैं बल्कि वह चाहे अनचाहे में पक्षपातपूर्ण क़दम उठा रही हैं।
इन हालात में फ़िलिस्तीन की जनता ने साहस का सुबूत दिया है और फ़िलिस्तीनी जनता शुरू से ही अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है और स्थानीय लोगों में यह विचार प्रबल हो चुका है कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए ख़ुद ही लड़ना होगा।