जायोनी कालोनियों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैः राष्ट्रसंघ
20 जनवरी के बाद राष्ट्रसंघ में स्थिति बदल जायेगीःडोनाल्ड ट्रंप
ऐसी स्थिति में कि जब जायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के साथ संबंधों में पुनर्विचार की धमकी दी है, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सुरक्षा परिषद ने इस्राईल द्वारा जायोनी कालोनियों के निर्माण की जो भर्त्सना की है और उसके निर्माण को रोके जाने की जो मांग की है उससे शांतिवार्ता कठिन हो जायेगी।
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने फिलिस्तीन की अवैध अधिकृत भूमियों में इस्राईल द्वारा जायोनी कालोनियों के निर्माण की भर्त्सना में पारित होने वाले प्रस्ताव की प्रतिक्रिया में दावा किया कि राष्ट्रसंघ में इस्राईल पर दबाव से फिलिस्तीनियों और इस्राईल के मध्य शांति वार्ता कठिन हो जायेगी।
उल्लेखनीय है कि सुरक्षा परिषद ने 24 दिसंबर की रात को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए इस्राईल द्वारा जायोनी कालोनियों के निर्माण की भर्त्सना की और उसके निर्माण को रोके जाने के पक्ष में मत दिया।
इस प्रस्ताव के अनुसार फिलिस्तीन की अवैध अधिकृत भूमियों में जायोनी शासन द्वारा हर प्रकार का निर्माण अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा और गम्भीर रूप से उससे क्षेत्र की शांति को आघात पहुंचेगा और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश का गठन खतरे में पड़ जायेगा।
सुरक्षा परिषद के 14 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया जबकि केवल अमेरिका ने उसके खिलाफ वोट दिया। 36 साल के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने इस्राईल द्वारा जायोनी कालोनियों के निर्माण के प्रस्ताव को वीटो नहीं किया। इस प्रस्ताव से जायोनी शासन क्रोधित हो गया है।
जायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू ने इस प्रस्ताव की प्रतिक्रिया में कहा कि तेलअवीव एक महीने से राष्ट्रसंघ से संबंधित संगठनों व संस्थाओं की सहायता और इसी प्रकार इस्राईल में राष्ट्रसंघ के प्रतिनिधि की उपस्थिति के बारे में पुनर्विचार कर रहा है जबकि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा परिषद में इस्राईल के विरुद्ध पारित होने वाले प्रस्ताव की प्रतिक्रिया में अपने शपथ लेने की तारीख की ओर संकेत किया और कहा कि 20 जनवरी के बाद राष्ट्रसंघ में स्थिति भिन्न हो जायेगी। MM