आतंकवाद, सऊदी अरब का सबसे बड़ा ग़ैर पेट्रोलियम निर्यात
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सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस देश के हज़ारों नागरिक आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं। सऊदी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर तुर्की ने बताया कि दो हज़ार से अधिक सऊदी नागरिक आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं लेकिन उनके बारे में सही जानकारी नहीं है कि वह किन देशों में सक्रिय हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २७, २०१६ १६:२५ Asia/Kolkata

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस देश के हज़ारों नागरिक आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं। सऊदी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर तुर्की ने बताया कि दो हज़ार से अधिक सऊदी नागरिक आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं लेकिन उनके बारे में सही जानकारी नहीं है कि वह किन देशों में सक्रिय हैं।

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सैकड़ों सऊदी नागरिक आतंकवाद में लिप्त होने के आरोप में अनेक देशों की जेलों में बंद हैं।

सऊदी अधिकारी की ओर से इस प्रकार का बयान आने से पहले ही अनेक संचार माध्यमों में व्यापक रूप से यह बहस हो रही है कि सऊदी अरब दुनिया में आतंकी विचारों का महत्वपूर्ण केन्द्र है। सऊदी अरब के भीतर और विदेशों में सऊदी अरब की ओर से जो गतिविधियां अंजाम दी जा रही हैं उनका जायज़ा लेने से पता चलता है कि आतंकियों में अधिकतर या तो सऊदी नागरिक हैं या सऊदी अरब की वहाबी विचारधारा से प्रभावित हैं और उन्हें आले सऊद से आर्थिक और सामरिक मदद मिल रही है। सऊदी अरब के समर्थन से सक्रिय आतंकी संगठन दाइश, अलक़ायदा, बोको हराम, अश्शबाब और अंसारुश्शरीया अफ़्रीक़, एशिया और यूरोप में सक्रिय हैं और यह विश्व शांति के लिए ख़तरे की घंटी है। विकीलीक्स के एक डाक्युमेंट के अनुसार अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन ने कहा कि सऊदी अरब दुनिया में आतंकी संगठनों की सबसे अधिक आर्थिक सहायता कर रहा है। हिलैरी क्लिंटन के अनुसार पाकिस्तान में तालेबान, अलक़ायदा और लशकरे तैयबा सऊदी अरब की आर्थिक मदद प्राप्त करने वाले प्रमुख संगठन हैं। यही नहीं 11 सितम्बर के आतंकी हमलों के 19 आरोपियों में से 15 सऊदी नागरिक थे। अमरीका ने 11 सितम्बर के हमलों के बारे में जो रिपोर्ट जारी की उसमें से 28 पृष्ठ छिपा लिए जिनके बारे में कहा जाता है कि वह आतंकी हमले में सऊदी अरब के राजकुमारों के लिप्त होने से संबंधित थे जबकि इस मामले में सीआईए के अधिकारियों का नाम भी सामने आया था।

आज यह सच्चाई सारी दुनिया के सामने है कि सऊदी अरब अफ़ग़ानिस्तान से लेकर अमरीका तक आतंकवाद का निर्यात कर रहा है। सीरिया, यमन, इराक़, अमरीका तथा यूरोपीय देशों में सैकड़ों सऊदी नागरिकों को आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ़तार किया जाना इस बात का प्रमाण है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यदि सऊद अरब जैसे रूढ़िवादी देशों और अमरीका जैसे पश्चिमी देशों का समर्थन न मिलता तो आतंकी संगठनों का इस बड़े पैमाने पर फैलाव न हो पाता। इस समय आतंकी संगठन सीरिया और इराक़ ही नहीं बल्कि मिस्र, लीबिया और ट्यूनीशिया जैसे अफ़्रीक़ी देशों में भी पूरी तरह सक्रिय हैं। कुछ गलियारे तो यहां तक कहते हैं कि सऊदी अरब तेल के बाद सबसे अधिक आतंकवाद का निर्यात करता है।