मस्जिदुल अक़सा के यहूदीकरण के प्रयास तेज़, इस्लामी जगत निश्चेत
फ़िलिस्तीनी हल्क़ों ने मस्जिदुल अक़सा के प्रांगड़ के नीचे ज़ायोनी शासन की नई खुदाई प्रक्रिया का रहस्योद्धाटन किया है।
बैतुल मुक़द्दस और पवित्र स्थलों की रक्षा करने वाली इस्लामी -ईसाई समिति का कहना है कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन मस्जिदुल अक़सा के नीचे दसियों सुरंगें खोद रहा है। बैतुल मुक़द्दस और पवित्र स्थलों की रक्षा करने वाली इस्लामी -ईसाई समिति के महासचिव हन्ना ईसा ने मस्जिदुल अक़सा और उसके आसपास बनी एेतिहासिक इमारतों के लिए सुरंगों की वजह से उत्पन्न होने वाले ख़तरों की ओर से सचेत करते हुए कहा कि ज़ायोनी शासन अब तक मस्जिदुल अक़सा के नीचे 27 सुरंगें खोद चुका है। उनका कहना था कि मस्जिदुल अक़सा के नीचे बनी हुई सुरंगें, ज़ायोनी कालोनियों से जुड़ी हुई हैं।
हन्ना ईसा ने कहा कि सुरंगों की खुदाई ने मस्जिदुल अक़सा के भीतरी भाग को एक बस्ती में परिवर्तित कर दिया है और यह कार्यक्रम मस्जिदुल अक़सा के यहूदीकरण की परिधि में अंजाम दिया जा रहा है।
ज़ायोनी शासन ने जब से मस्जिदुल अक़सा का अतिग्रहण किया है तब से अब तक वह मस्जिदुल अक़सा और उसके पास स्थित प्राचीन शहरों में निरंतर खुदाईयां कर रहा है और उसने कई भूमिगत सुरंगें बना ली हैं जिसका मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीनियों को ज़बरदस्ती पलायन पर विवश करना और मस्जिदुल अक़सा के आसपास के क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है।
ज़ायोनी शासन ने इसी प्रकार मुसलमानों के पहले क़िब्ले अर्थात मस्जिदुल अक़सा को ध्वस्त करने की अपनी कार्यवाही को तेज़ करते हुए इस पवित्र स्थल के नीचे और उसके आसपास विभिन्न सुरंगें बनाई हैं। ज़ायोनी शासन यह कार्यवाही करके मस्जिदुल अक़सा के स्तंभों को कमज़ोर करना चाहता है ताकि छोटा सा भूकंप या किसी भी प्रकार की दूसरी छोटी घटना से मस्जिदुल अक़सा पूरी तरह धवस्त हो जाए। बहरहाल ज़ायोनी शासन की इन कार्यवाहियों पर इस्लामी देशों के नेताओं और मुसलमानों को ख़ामोश नहीं रहना चाहिए और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए। (AK)