जस्टा क़ानून के क्रियान्वयन से सऊदी अरब का भय
वाॅशिंग्टन में सऊदी अरब के दूतावास ने ट्वीट करके आतंकवाद के समर्थकों के विरुद्ध क़ानून (JASTA) की आलोचना की है और दावा किया है कि इस क़ानून का अमरीका के सैन्य विभागों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
जस्टा क़ानून के बारे में वाॅशिंग्टन में सऊदी अरब के दूतावास की चेतावनी को जल्द ही डोनल्ड ट्रम्प का कार्यकाल आरंभ के परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। इस चेतावनी का रुख़ ट्रम्प ही की ओर है ताकि वे वाॅशिंग्टन और रियाज़ के रणनैतिक संबंधों की रक्षा के लिए इस क़ानून के क्रियान्वयन की अनदेखी कर दें। सऊदी दूतावास के ट्वीट में कहा गया है कि अगर एेसा नहीं होता है तो फिर अमरीका को सैन्य संबंधों और सहयोग में सऊदी अरब की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में रहना चाहिए। फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों ने भी सऊदी अरब के समन्वय से जस्टा क़ानून को अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के विरुद्ध बताया है और अमरीका से संबंध ख़राब होने की ओर से सचेत किया है।
सऊदी अरब के अधिकारियों ने मई 2016 में अमरीकी सेनेट में जस्टा विधेयक के पारित होने के बाद ही धमकी दी थी कि वे अमरीका के ख़िलाफ़ जवाबी कार्यवाही करेंगे। सऊदी अरब ने उस समय धमकी दी थी कि अगर इस विधेयक को क़ानून के रूप में स्वीकृति मिल गई तो वह अमरीका में अपनी संपत्ति को, जो 117 अरब डाॅलर के बाॅंड्ज़ के रूप में है, एक साथ बेच देगा। इसके बाद अमरीका ने इस क़ानून को लागू करने में हिचकिचाहट दिखाना शुरू कर दिया था। वाइट हाउस का कहना है कि उसे इस बात की चिंता है कि अगर इस क़ानून के क्रियान्वयन से सरकारों की सुरक्षा का अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांत प्रभावित हुआ तो अन्य देशों में उसे भी क़ानून के कटहरे में खड़ा किया जा सकता है। बहरहाल यह केवल बहाना है और ओबामा सरकार, जो अपने अंतिम दिन बिता रही है इस बात को लेकर चिंतित है कि कहीं इस क़ानून के क्रियान्वयन से सऊदी अरब और अमरीका के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़ जाए जबकि कांग्रेस का कहना है कि सऊदी अरब इस पोज़ीशन में नहीं है कि जस्टा क़ानून लागू करने के कारण अमरीका पर दबाव डाल सके। (HN)