बहरैन की तानाशाही सरकार ने तीन लोगों को फांसी दी
बहरैनी जनता का दमन वर्षों से जारी है
बहरैन के मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव के नाम पत्र लिखकर उनसे मांग की थी कि बहरैन की जेल में बंद जिन तीन लोगों को मौत की सज़ाई सुनाई गयी है उनकी आज़ादी के संबंध में तुरंत कार्यवाही करें पंरतु बहरैन की तानाशाही सरकार ने किसी प्रकार की मांग पर ध्यान दिये बिना रविवार की सुबह तीन लोगों को मृत्युदंड दे दिया।
बहरैन में आठ संगठनों ने राष्ट्रसंघ के महासचिव आन्टोनियो गुटेरस के नाम एक पत्र लिखकर उनसे मांग की थी कि जिन लोगों को मृत्युदंड दिया जाने वाला है उनमें से कुछ एसे हैं जिन्हें आस्था के संबंध में मृत्युदंड दिया जाने वाला है इस बात के दृष्टिगत वह तुरंत कार्यवाही करें और मृत्युदंड का आदेश निरस्त करवाकर उनकी आज़ादी का मार्ग प्रशस्त करें।
बहरैन की तानाशाही सरकार की अदालत फरवरी 2011 से अब तक बहुत से लोगों के विरुद्ध अन्यायपूर्ण ढंग से मौत की सज़ा सुना चुकी है जो मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय घोषणापत्रों के विरुद्ध है।
बहरैन में राजनीतिक बंदियों को जो मौत की सज़ा दी जाती है उस पर कम ही अमल होता है परंतु इस बार आले ख़लीफा ने अपने विरोधियों को मृत्यु दंड दिये जाने पर आम जनमत की प्रतिक्रिया की उपेक्षा करते हुए यह अपराध अंजाम दिया है।
यह एसी स्थिति में है जब अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ढिलाई और आले सऊद के समर्थन के कारण बहरैन की तानाशाही सरकार ने अपने विरोधियों के खिलाफ विभिन्न मृत्यु दंड जारी कर रखे हैं।
फरवरी वर्ष 2011 से बहरैन में इस देश की तानाशाही सरकार के खिलाफ जनक्रांति जारी है और लोग आज़ादी और न्याय स्थापित किये जाने और भेदभाव समाप्त किये जाने की मांग कर रहे हैं पंरतु बहरैन की तानाशाही सरकार जनता की मांगों पर ध्यान देने के बजाये उसका दमन कर रही है किन्तु बहरैनी जनता का शांतिपूर्ण प्रदर्शनों व विरोधों का जारी रहना इस बात का सूचक है कि आले खलीफा सरकार अपनी दमनकारी कार्यवाहियों व नीतियों से भी जनता की मांग दबा नहीं सकी है और बहरैनी जनता का कहना है कि डेमोक्रेसी की स्थापना तक उसका संघर्ष जारी रहेगा। MM