होशियार मिस्र का तीरान और सनाफ़िर कार्ड
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क़ाहिरा सरकार ने पिछले वर्ष मार्च महीने के अंत में रियाज़ के साथ समुद्री सीमा का समझौता करने के बाद घोषणा की कि तीरान और सनाफ़िर स्ट्राटैजिक द्वीप सऊदी अरब की जलसीमा में स्थित हैं।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Jan २०, २०१७ १६:४५ Asia/Kolkata
  • होशियार मिस्र का तीरान और सनाफ़िर कार्ड

क़ाहिरा सरकार ने पिछले वर्ष मार्च महीने के अंत में रियाज़ के साथ समुद्री सीमा का समझौता करने के बाद घोषणा की कि तीरान और सनाफ़िर स्ट्राटैजिक द्वीप सऊदी अरब की जलसीमा में स्थित हैं।

क़ाहिरा की इस घोषणा पर मिस्र के राजनैतिक, मीडिया और नागरिक हल्क़ों ने कड़ी प्रतक्रिया व्यक्त की और लोगों का आक्रोष फूट पड़ा । मिस्री जनता ने सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करते हुए राजधानी सहित देश के विभिन्न शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों के दौरान मिस्र की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग किया और लगभग 200 कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया।

इस समझौते की समीक्षा करने के बाद मिस्र के सर्वोच्च न्यायालय ने मई के महीने में इन द्वीपों को सऊदी अरब के हवाले किए जाने के सरकार के फ़ैसले को महत्वहीन बताया किन्तु सीसी सरकार ने इस योजना को पास होने के लिए संसद में भेजा जिस पर सर्वोच्च न्यायालय दोबारा हस्तक्षेप पर विवश हुआ।

लाल सागर में स्थित यह दोनों द्वीप इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन द्वीपों से इस्राईल अक़बा खाड़ी से स्वतंत्र जलक्षेत्र में पहुंच सकता है। इसीलिए इन द्वीपों पर जिस देश का भी क़ब्ज़ा होगा वह आर्थिक और सैन्य दृष्टि से इस्राईल की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

इसी परिप्रेक्ष्य में मिस्र के भीतर इस मुद्दे के क़ानूनी पचड़े में पड़ने से पहले मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह सीसी ने सऊदी अरब से भारी वित्तीय और तेल सहायता प्राप्त कर ली विशेषकर यह कि रियाज़ ने देश के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति के विरोध के कारण जो इख़वानुल मुसलेमीन की विचारधारा रखते थे, सीसी के सैन्य विद्रोह का समर्थन किया था।

यह ऐसी स्थिति में है कि कुछ टीकाकार तीरान और सनाफ़िर द्वीप को सऊदी अरब के हवाले किए जाने के बारे में सर्वोच्च न्यायलय और सीसी की सरकार के बीच झगड़े को सीसी की होशियारी भरी चाल से संज्ञा दे रहे हैं ताकि इस प्रकार वह सऊदी अरब से विभिन्न आर्थिक विशिष्टताएं प्राप्त कर सकें। सऊदी अरब और मिस्र के मध्य होने वाले समझौते के आधार पर सऊदी अरब अगले पांच वर्ष तक मिस्र को 23 अरब डालर के तेल बेचेगा किन्तु पिछले तीन महीने से अधिक समय से सऊदी अरब की अरामको तेल कंपनी क़ाहिरा को तेल निर्यात नहीं कर रही है, सीसी ने द्वीपों के मालेकाना अधिकार का मुद्दा छेड़ दिया है।

इसी आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि तीरान और सनाफ़िर द्वीपो को सऊदी अरब को देने के मामले में मिस्र के सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से खेल लंबा खिंच सकता है और इससे क़ाहिरा के पास सऊदी अरब से जोड़ तोड़ करने और अधिक विशिष्टा प्राप्त करने का अवसर हाथ लग गया है।

दूसरी मिस्र के सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले से मिस्री जनता को यह भी संदेश मिलता है कि देश की न्यायपालिका स्वाधीन और स्वतंत्र है और यह सीसी की सरकार में लोकतंत्र का जीता जागता प्रमाण है। वास्तव में जनरल सीसी का यह इरादा है कि वह रियाज़ के साथ होने वाले समझौते के विरुद्ध देश के भीतर पाये जाने वाले विरोध को बड़ा दिखाकर सऊदी अरब को अधिक विशिष्टता देने पर मजबूर करना चाहते हैं।

वास्तव में मिस्र के राष्ट्रपति इस्राईल के बाक़ी रहने और उसकी सुरक्षा में उक्त द्वीपों के महत्व से अवगत हैं और यदि सऊदी अरब मिस्र को इस प्रकार की विशिष्टताएं नहीं देता तो उस पर तेल अवीव का दबाव पड़ सकता है क्योंकि वर्तमान समय में सऊदी अरब यमन, इराक़ और सीरिया के युद्धों में घिरे होने के कारण भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

इसके अतिरिक्त मिस्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सीसी की अक्षमता और देश की आर्थिक समस्याएं उनकी सरकार को दिवालिएपन के ख़तरे में डाल सकती है। इन परिस्थितियों में सऊदी अरब मिस्र में अपनी घटक सरकार को बचाने के लिए मैदान में कूद पड़ेगा और यह सहायता कुवैत और संयुक्त अरब इमारात सहित सऊदी अरब के दूसरे घटकों के माध्यम से दी जा सकती है, विशेषकर इन समाचारों के बाद कि क़ाहिरा तेहरान से निकट हो रहा है। अलबत्ता मिस्र द्वारा ईरान से निकट होने की कार्यवाही को सऊदी अरब गंभीर ख़तरा नहीं समझ रहा है क्योंकि मिस्र और सऊदी अरब के मध्य भीषण मतभेद के बावजूद मिस्री यह जानते हैं कि ईरान से हर प्रकार का संबंध, रियाज़ मोर्चे से संबंध समाप्त करने के अर्थ में होगा। (AK)