क्या चील के घोंसले में मांस खोज रहा है तुर्की?
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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने रविवार से फ़ार्स खाड़ी के तीन देशों बहरैन, सऊदी अरब और क़तर की दौरा शुरू किया। इस दौरे के कई उद्देश्य हो सकते हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb १३, २०१७ १४:२३ Asia/Kolkata
  • क्या चील के घोंसले में मांस खोज रहा है तुर्की?

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने रविवार से फ़ार्स खाड़ी के तीन देशों बहरैन, सऊदी अरब और क़तर की दौरा शुरू किया। इस दौरे के कई उद्देश्य हो सकते हैं।

अर्दोग़ान के बारे में कहा जाता है कि वह क्षेत्र और विश्व में राजनैतिक और आर्थिक मंचों पर आने वाले बदलाव को बहुत जल्द सूंघ लेने वाली नाक रखते हैं और हवा का रुख़ देखकर झटपट अपना पाला बदल लेने में माहिर हैं। अर्दोग़ान को आभास हो गया है कि अमरीका का ट्रम्प प्रशासन ईरान के मुक़ाबले में सुन्नी गठबंधन बनाने की चिंता में है जिसमें प्रमुख रूप से अरब देश शामिल होंगे इसी लिए तुर्क राष्ट्रपति ने फ़ार्स खाड़ी के देशों का दौरा किया है। अर्दोग़ान चाहते हैं कि यदि इस प्रकार का कोई ख़ैमा बनने जा रहा है तो वह उस ख़ैमे के मूल स्तंभ का स्थान ले लें तथा तुर्की को मिस्र के विकल्प के रूप में पेश कर दें। इसलिए कि सऊदी अरब और क़तर सहित फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों से मिस्र के संबंध बड़े तनावपूर्ण हैं।

फ़ार्स खाड़ी के जिन अरब देशों के दौरे पर अर्दोग़ान गए हैं वह तुर्क राष्ट्रपति की बात बहुत ध्यान से सुनेंगे इसलिए कि सीरिया, इराक़ और यमन के बारे में अपनी नीतियों में भारी विफलताओं से यह देश भी बहुत परेशान हैं।

तुर्की की अर्थ व्यवस्था के बारे में फ़ाइनेन्शियल टाइम्ज़ तथा आईएमएफ़ की रिपोर्टों में जो विशलेषण आया है उसके अनुसार यह अर्थ व्यवस्था तबाही की कगार पर पहुंच चुकी है। तुर्की की करेन्सी लीरा के मूल्य में लगातार गिरावट आ रही है। हालिया महीनों के दौरान इसकी क़ीमत में दो तिहाई की कमी आ गई है। तुर्की के सेंट्रल बैंक ने इस स्थिति से निपटने के लिए डेढ़ अरब डालर की बाज़ार में उतारे लेकिन इसका भी कोई स्थायी असर नहीं हुआ।

आईएमएफ़ के अनुसार तुर्की के आर्थिक विकास की दर वर्ष 2017 में तीन प्रतिशत से भी कम रहेगी जबकि वर्ष 2009 में यह दर 10 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

तुर्की को पर्यटन से सालाना लगभग 36 अरब डालर की आमदनी हो जाती है लकिन अंकारा और इस्ताबूंल सहित अनेक नगरों में होने वाले हमलों के कारण पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आ गई है।

अर्दोग़ान फ़ार्स खाड़ी के इन अरब देशों से मांग करेंगे कि वह तुर्क उत्पादों के लिए अपने बाज़ार खोल दें तथा तुर्की में पूंजीनिवेश करें। लेकिन एक बड़ी समस्या यह है कि तुर्की अपने उत्पादक इन देशों में ज़मीनी रास्ते से नहीं भेज सकेगा क्योंकि अपनी नीतियों के चलते तुर्की ने सीरिया और इराक़ का रास्ता बंद कर लिया है। सीरिया और इराक़ में खुले हस्तक्षेप के कारण तुर्की ने ख़ुद ही मुसीबत मोल ली है।

दूसरी ओर फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों को विश्व मंडियों में तेल की क़ीमतों में आने वाली गिरावट के कारण वित्तीय समस्याओं का सामना हैं और इन देशों ने कठोर आर्थिक नीतियां बनाना शुरू कर दिया है। यह देश तो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से क़र्ज़ा लेने पर भी मजबूर हुए हैं। इस लिए वर्तमान परिस्थितियों में एसा नहीं लगता कि अर्दोग़ान को इन देशों से कोई उल्लेखनीय आर्थिक या राजनैतिक मैदद मिल सकती है।

साभार, रायुलयौम