बहरैन में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर आले ख़लीफ़ा के अत्याचार
बहरैन में तानाशाही शासन आले ख़लीफ़ा के अत्याचारों और हाल ही में मौत की सज़ा के बहाने शहीद होने वाले तीन युवकों का अंतिम संस्कार न करने देने के ख़िलाफ़ हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया और उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया।
इसी प्रकार बहरैनी जनता ने शहीद होने वालों के परिजनों को उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति नहीं देने की निंदा की और आले ख़लीफ़ा शासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की।
बहरैन के धर्मगुरुओं ने आले ख़लीफ़ा शासन की अत्याचारपूर्ण नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए एक बयान जारी किया था और जनता से अपील की थी कि अधिक संख्या में शहीदों के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार में भाग लें।
शहीद होने वाले तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर आले ख़लीफ़ा शासन ने, सुरक्षा बलों पर हमला करने के झूठे और निराधार आरोप लगाए थे। बहरैनी सुरक्षा बलों ने इसी सिलसिले में अन्य 7 राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल में क़ैद कर रखा है।
बहरैन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों के साथ बहुत ही कठोर व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें अत्यधिक प्रताड़ित किया जा रहा है।
बहरैनी जनता देश में 14 फ़रवरी 2011 से लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना और राज्य स्तर पर मतभेदों को समाप्त करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है। लेकिन आले ख़लीफ़ा शासन सऊदी अरब और अमरीका जैसे देशों के समर्थन से जनता की आवाज़ को दबाने में लगा हुआ है। हालिया पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान, आले ख़लीफ़ा शासन ने अपने अत्याचारों में अत्यधिक वृद्धि कर दी है और जेल में क़ैद कार्यकर्ताओं को मौत की सज़ा के नाम पर शहीद करना शुरू कर दिया है।