वाइट हाउस नेतनयाहू की धूर्तता का मंच
वाइट हाउस नेतनयाहू की धूर्तता का मंच
ज़ायोनी शासन के प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू का अमरीका का सफ़र और अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के साथ मुलाक़ात में उनका बयान धूर्तता से भरा हुआ था। नेतनयाहू ने अपने बयान में मुसलमानों पर चमरपंथ व आतंकवाद का आरोप लगाया। लेकिन जो बात विचार योग्य है वह आतंकवाद के बारे में नेतनयाहू का धूर्तता से भरा बयान है। नेतनयाहू ऐसी हालत में आतंकवाद के ख़तरे की बात कर रहे और मुसलमानों पर चरमपंथ का आरोप लगा रहे हैं कि इस्राईल को आतंकवाद के ज़रिए ही वजूद दिया गया।
इस्राईल को वजूद देने में तीन आतंकवादी गुट एयरगोन, एश्तर्न और हगाना ने बहुत ज़्यादा विध्वंसक गतिविधियां कीं। इन्हीं गुटों ने इस्राईल के वजूद से पहले 30 और 40 के दशक में फ़िलिस्तीनियों को अपना वतन छोड़ने पर मजबूर किया।
ज़ायोनी शासन का इतिहास दुनिया के विभिन्न देशों में आतंकवादी कृत्यों से भरा हुआ है। पिछले तीन दशक के दौरान उसने फ़िलिस्तीनी और अरब अधिकारियों के ख़िलाफ़ 14 आतंकवादी हमले कराए कि इस दौरान 16 फ़िलिस्तीनी और अरब नेता व अधिकारी मारे गए। कुछ दिन पहले इस्राईली टीवी चैनल-2 ने ज़ायोनी गुप्तचर संस्था मोसाद में ‘कीदून’ नामक टेरर इकाई के वजूद की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस इकाई ने ईरान सहित दुनिया के विभिन्न देशों में दसियों आतंकी हमले किए हैं।
ज़ायोनी शासन के व्यवहार के मद्देनज़र अब इस बात में संदेह नहीं रह गया है कि दुनिया को एक आतंकवादी व दुष्ट शासन का सामना है कि जिसके वजूद से क्षेत्र सहित दुनिया की शांति ख़तरे में पड़ गयी है। लेकिन जिस चीज़ ने नेतनयाहू को धूर्तता दिखाने के लिए उचित अवसर मुहैया किया है वह अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का चरमपंथी दृष्टिकोण है। बहुत सी सरकारों व देशों की ओर से अनुशंसा के बावजूद ट्रम्प मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रहे हैं।
ऐसे माहौल में वाइट हाउस ज़ायोनी शासन के मानवता विरोधी व धूर्ततापूर्ण नीतियों को फैलाने का मंच बन गया है और यह विषय फ़िलिस्तीनियों और इस्लामी जगत के ख़िलाफ़ अमरीका और ज़ायोनी शासन की मिली-जुली साज़िश का पता देता है। (MAQ/T)