मध्यपूर्व को अधिक से अधिक संकटग्रस्त करने के प्रयास
सऊदी अरब के विदेशमंत्री का कहना है कि अमरीका के सहयोग से वे सऊदी सैनिकों को सीरिया भेजना चाहते हैं।
आदिल अलजुबैर ने कहा है कि उनका देश और फ़ार्स की खाड़ी के देश, अपनी थलसेना के सैनिकों को सीरिया भेजना चाहते हैं। सऊदी अरब के विदेशमंत्री ने कहा कि यह सैनिक, सीरिया में अमरीकी सैनिकों के साथ सहयोग करेंगे।
आदिल अलजुबैर ने सऊदी अरब की हस्तक्षेपपूर्ण नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि जनेवा शांति वार्ता का उद्देश्य यह होना चाहिए कि सीरिया के लिए बिना बश्शार असद के बिना सीरिया के लिए अंतरिम सरकार की योजना तैयार की जाए। सऊदी अरब के विदेशमंत्री का वक्तव्य यह दर्शाता है कि सऊदी अरब और फ़ार्स की खाड़ी के देशों के शासक, क्षेत्र में अमरीका की नीतियों को लागू करने वाले हैं। ठीक एेसे समय में कि जब अमरीका, अपने थल सैनिकों को सीरिया भेजने की समीक्षा कर रहा है, सऊदी अरब और फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों की ओर से अपने सैनिक सीरिया भेजे जाने की घोषणा यह सिद्ध करती है कि क्षेत्र के बारे में विदेशियों के षडयंत्रों का वे समर्थन कर रहे हैं।
सऊदी अरब की इस नई घोषणा ने उसके हस्तक्षेपपूर्ण व्यवहार को प्रदर्शित किया है। सऊदी अरब का व्यवहार यह दर्शाता है कि उसका दमन के सऊदी अरब तक सीमित नहीं है बल्कि वह क्षेत्र की जनता पर भी अत्याचार कर रहा है। सीरिया के भीतर सैन्य हस्तक्षेप पर आधारित सऊदी अरब के क्रियाकलाप एसी स्थिति में जारी हैं कि जब वह सीरिया की क़ानूनी सरकार के विरुद्ध गोपनीय ढंग से भी षडयंत्र रच रहा है। टीकाकारों का कहना है कि सऊदी अरब और कुछ अरब एवं पश्चिमी देशों के षडयंत्रों के कारण सीरिया सन 2011 से एेसे संकट में फंसा हुआ है जो आज भी जारी है और जिसके कारण इस देश को बहुत अधिक जानी और माली क्षति हुई है। रानजैतिक टीकाकार यह कहते हैं कि क्षेत्र को क्षति पहुंचाने के बारे में सऊदी अरब की ओर से किसी भी प्रकार के प्रयास, स्वयं सऊदी अरब को गहरे संकट में डाल सकते हैं।