सऊदी अरब जायोनी शासन से संबंध विस्तार के प्रयास में है
फ्रांस की “इन्टेलीजेन्स ऑनलाइन” साइट ने भी अभी कुछ दिन पहले सऊदी अरब और जायोनी शासन के मध्य विस्तृत सहकारिता की सूचना दी थी।
इस्राईल की “डेब्का” साइट ने इस बात का रहस्योदघाटन किया है कि सऊदी अरब की गुप्तचर संस्था के प्रमुख ख़ालिद बिन अली अलहमीदान ने 21 फरवरी 2017 को तेलअवीव और रामल्लाह की यात्रा की। इसी प्रकार इस साइट ने लिखा कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू ने 15 फरवरी वर्ष 2017 को वाशिंग्टन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भेंट की और दोनों पक्षों ने विभिन्न समस्याओं की समीक्षा के लिए अमेरिका- इस्राईल और अरब देशों के मध्य त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई।
इसी प्रकार फ्रांस की “इन्टेलीजेन्स ऑनलाइन” साइट ने भी अभी कुछ दिन पहले सऊदी अरब और जायोनी शासन के मध्य विस्तृत सहकारिता की सूचना दी थी।
उल्लेखनीय है कि जायोनी शासन की बुनियाद रखे जाने के समय से सऊदी अरब ने उससे आधिकारिक संबंध स्थापित नहीं किया था परंतु हमेशा जायोनी शासन और सऊदी अरब के मध्य गुप्त संबंध रहे हैं और क्षेत्र की नीतियों में सऊदी अरब जायोनी शासन के साथ रहा है परंतु सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों की अवैध अधिकृत फिलिस्तीन यात्रा में वृद्धि इस बात की सूचक है कि इस्राईल के संबंध में सऊदी अरब की नीतियां परिवर्तित हो रही हैं विशेषकर इसलिए कि जायोनी शासन भी फार्स खाड़ी के अरब देशों के साथ संबंध स्थापित करने और उसे स्पष्ट किये जाने का इच्छुक है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सऊदी अरब के पूर्व गुप्तचर प्रमुख बंदर बिन सुल्तान के सलाहकार अनवर इश्की ने बारमबार जायोनी अधिकारियों से भेंट की है और उन्हें सऊदी अरब और जायोनी शासन के मध्य संबंधों को धीरे- धीरे स्पष्ट करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सऊदी अरब और जायोनी शासन के मध्य सुरक्षा सहकारिता का जो रहस्योदघाटन हुआ है वह दोनों पक्षों के मध्य वर्षों से व्यापक पैमाने पर होने वाली सहकारिता का मात्र एक छोटा सा भाग है और पश्चिमी देशों, सऊदी अरब और जायोनी शासन के मध्य होने वाली सहकारिता का परिणाम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकटों के उत्पन्न होने के अतिरिक्त कुछ और नहीं निकला है। MM