बहरैन में शैख़ ईसा क़ासिम के ख़िलाफ़ मुक़द्दमे की सुनवाई टली
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शैख़ ईसा क़ासिम (फ़ाइल फ़ोटो)
बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन ने एक बार फिर अपने राजनैतिक क़दम के अंजाम के डर से इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के ख़िलाफ़ ग़ैर क़ानूनी मुक़द्दमे की सुनवाई को टाल दिया है।
समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार, अदालत अब तक कई बार शैख़ ईसा क़ासिम के ख़िलाफ़ ग़ैर क़ानूनी मुक़द्दमे को टाल चुकी है। इस अदातल पर आरोप है कि वह आले ख़लीफ़ा शासन के इशारे पर काम करती है। सोमवार को शैख़ ईसा क़ासिम के ख़िलाफ़ अदालत में सुनवाई होनी थी जो अब 14 मार्च को होगी।
इससे पहले बहरैनी धर्मगुरुओं की अपील पर रविवार की रात हज़ारों की संख्या में बहरैनी जनता ने शैख़ ईसा क़ासिम का आख़री सांस तक साथ देने के लिए देश के अनेक क्षेत्रों में प्रदर्शन किए।
आले ख़लीफ़ा शासन ने जून 2016 से शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द कर दी है और उस समय से अब तक वह देराज़ इलाक़े में स्थित अपने घर में नज़रबंद हैं और बहरैनी जनता भी शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में उनके घर के सामने धरने पर बैठी है।
आले ख़ीफ़ा शासन का आरोप है कि शैख़ ईसा क़ासिम ने धर्मगुरु के रूप में अपने स्थान का दुरुपयोग करते हुए विदेशी हितों के लिए काम किया है। इस आरोप को शैख़ ईसा क़ासिम ने कड़ाई से रद्द किया है।
ग़ौरतलब है कि बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से आले ख़लीफ़ा शासन के ख़िलाफ़ जनक्रान्ति जारी है। (MAQ/N)