आयतुल्लाह शेख़ ईसा क़ासिम को बहरैन से निष्कासित करने की साज़िश
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बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन, इस देश के सबसे वरिष्ठ शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह शेख़ ईसा क़ासिम को देश से निष्कासित करने की साज़िश रच रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २७, २०१७ १५:१९ Asia/Kolkata

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन, इस देश के सबसे वरिष्ठ शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह शेख़ ईसा क़ासिम को देश से निष्कासित करने की साज़िश रच रहा है।

बहरैन के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि शेख़ ईसा क़ासिम के बारे में अदालत जल्दी ही कोई फ़ैसला करेगी। शेख़ ईसा क़ासिम का बहरैनी समाज में काफ़ी अधिक प्रभाव है। शेख़ ईसा क़ासिम ने देश में लोकतंत्र की मांग को मज़बूत करने में काफ़ी अहम भूमिका निभाई है। हालांकि पिछले 6 वर्षों के दौरान देश में जारी जनांदोलन के शांतिपूर्ण रहने पर उन्होंने हमेशा बल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने आले ख़लीफ़ा के तानाशाही शासन के अत्याचारों पर कभी चुप्पी नहीं साधी है।

आले ख़लीफ़ा शासन ने देश में लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाकर देख लिया, लेकिन वह जनता की आवाज़ को दबाने में सफल नहीं हो सका। यही कारण है कि अब वह जनता में लोकप्रिय नेताओं को ही रास्ते से हटाने की साज़िश रच रहा है। आले ख़लीफ़ा शासन का मानना है कि अगर समाज को जन प्रतिनिधियों से काट दिया जाए तो देश में जारी लोकतंत्र की आवाज़ को कुचला जा सकता है और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को समाप्त किया जा सकता है।

बहरैनी कार्यकर्ता हसन अल-मरज़ूक़ का इस संदर्भ में कहना हैः

बहरैन में बेरोज़गारी बहुत अधिक है और जनता के एक बड़े वर्ग को सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों का सामना है। देश में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराया धमकाया जाता है और उन्हें जेलों में क़ैद कर दिया जाता है। मानवाधिकार कार्यकर्ता नासिर अब्दुल इमाम ने देश में भेदभाव के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए एक संगठन का गठन किया। लेकिन उन्हें इसकी सज़ा दी गई और आज वह जेल में क़ैद हैं।

आले ख़लीफ़ा शासन के इन अत्याचारों के बावजूद, बहरैनी धर्मगुरुओं, राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का संघर्ष जारी है और उन्हें विश्वास है कि बहुत जल्द अत्याचारियों की पराजय और जनता की जीत होगी।