क्या मोहम्मद बिन सलमान ताजपोशी के क़रीब पहुंच गए हैं?
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हमें यह नहीं मालूम कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब के डिप्टी क्राउन प्रिंस से अपनी मुलाक़ात का समय क्यों बदला और गुरूवार के बजाए दो दिन पहले ही रात्रिभोज पर उनको क्यों निमंत्रित करके विस्तार से बात की, लेकिन यह नतीजा तो निकाला ही जा सकता है कि जिस तरह से मुहम्मद बिन सलमान का भव्य स्वागत हुआ और उन्हें राष्ट्राध्यक्ष स्तर को जो डिनर दिया गया वह मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका के विशेष विश्वास की निशानी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १५, २०१७ १३:०५ Asia/Kolkata
  • क्या मोहम्मद बिन सलमान ताजपोशी के क़रीब पहुंच गए हैं?

हमें यह नहीं मालूम कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब के डिप्टी क्राउन प्रिंस से अपनी मुलाक़ात का समय क्यों बदला और गुरूवार के बजाए दो दिन पहले ही रात्रिभोज पर उनको क्यों निमंत्रित करके विस्तार से बात की, लेकिन यह नतीजा तो निकाला ही जा सकता है कि जिस तरह से मुहम्मद बिन सलमान का भव्य स्वागत हुआ और उन्हें राष्ट्राध्यक्ष स्तर को जो डिनर दिया गया वह मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका के विशेष विश्वास की निशानी है।

अमरीका के वर्तमान प्रशासन ने मुहम्मद बिन सलमान का स्वागत भविष्य के नरेश के रूप में किया है और उन्हें फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र में अमरीका का सबसे मज़बूत आदमी ज़ाहिर करने की कोशिश की गई है।

राष्ट्रपति ट्रम्प व्यापारी हैं और फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र को भलीभांति जानते हैं। मुहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब में सभी आर्थिक विषयों का कर्ता-धर्ता माना जाता है। मुहम्मद बिन सलमान डिप्टी क्राउन प्रिंस का पद संभालने से पहले भी अनेक कम्पनियों के मालिक थे और आज भी हैं। उन्होंने 2030 आर्थिक विजन भी पेश किया है जिसके लिए वह निवेष कोष बनाना चाहते हैं जो बहुत बड़ा कोष होगा। मुहम्मद बिन सलमान आरामको कंपनी के 5 प्रतिशत शेयर बेचने का इरादा रखते हैं।

मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका ने इस तरह भरोसा जताकर वास्तव में उस धारणा को समाप्त कर दिया है जिसके अनुसार सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन नाएफ़ को अमरीका का सबसे क़रीबी व्यक्ति माना जाता था और यह समझा जाता था कि सऊदी अरब के भीतर और क्षेत्र में अपनी योजनाओं के लिए अमरीका मुहम्मद बिन नाएफ़ पर बहुत भरोसा करता है। इस धारणा को उस समय और बल मिला था जब सीआईए के प्रमुख माइकल बोम्बीदो ने सऊदी अरब की यात्रा में बड़ी रूचि से मुहम्मद बिन नाएफ़ से मुलाक़ात की और नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ सहित अन्य अधिकारियों का पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया था।

वाशिंग्टन दौरे का निमंत्रण देकर ट्रम्प ने इस धारणा पर विराम लगा दिया। इस लिए कि ट्रम्प को पता है कि मुहम्मद बिन सलमान के ही पास राजनैतिक और आर्थिक क्षेत्रों के अधिकार हैं और सऊदी अरब में उन्हीं का फ़ैसला आख़िरी होता है हालांकि उनकी उम्र अभी मात्र 31 साल है। यमन युद्ध का निर्णय मुहम्मद बिन सलमान ने किया, अरामको कंपनी के पांच प्रतिशत शेयर बेचने का बड़ा फ़ैसला भी उन्हीं ने किया। यानी वही सऊदी अरब की दुधारू गाय हैं।

इस यात्रा में वैसे तो अनेक मुद्दों पर बात हुई होगी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सऊदी अरब से अरबों डालर की रक़म वसूलने का ट्रम्प सरकार का कार्यक्रम होगा। ट्रम्प मध्यपूर्व में सऊदी अरब को राजनैतिक समर्थन देने और मदद करने के बदले यह रक़म सऊदी अरब से वसूल रहे हैं।

ट्रम्प तो फ़ार्स खाड़ी के देशों को पहले ही कोष का नाम दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों के बचे रहने का सारा श्रेय अमरीका को जाता है। यदि अमरीका न होता तो यह सरकारें अब तक बाक़ी न रहतीं। ठोस सूचना है कि ट्रम्प ने कुवैत नरेश से 9 अरब डालर की रक़म वर्ष 1991 के युद्ध में अमरीका द्वारा कुवैत का साथ देने के बदले में मांगी है।

ट्रम्प और मुहम्मद बिन सलमान की मुलाक़ात के बारे में अधिक जानकारियां अमरीकी मीडिया में आने की प्रतीक्षा है उसी समय इस बारे में ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकता है लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि यह मुलाक़ात मुहम्मद बिन सलमान को जल्द सऊदी अरब के तख़्त पर पहुंचाने में मदद करेगी।

साभार रायुलयौम