बहरैन, नागरिकता समाप्त करने में आले ख़लीफ़ा शासन सबसे आगे
बहरैन की एक क़ानूनी संस्था ने मंगलवार को घोषणा की है कि आले ख़लीफ़ा शासन ने राजनैतिक कारणों से इस देश के 410 से अधिक नागरिकों की नागरिकता रद्द कर दी है।
मिरअतुल बहरैन वेब साइट की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार संस्था के धार्मिक स्वतंत्रता के विभाग के प्रमुख सैयद अब्बास शब्बर ने यह बयान करते हुए कि आले ख़लीफ़ा शासन ने शीया धर्मगुरुओं सहित विरोधियों को दंडित करने के हथकंड के रूप में नागरिकों रद्द करना आरंभ किया है, कहा कि जिन पंद्रह लोगों की हाल ही में नागरिकता रद्द की गयी है उनमें बहरैन के तीन वरिष्ठ धर्म गुरु शामिल हैं। इस संस्था की ओर से जारी किए गये आंकड़ों के आधार पर पिछले एक सप्ताह के दौरान देश के 21 नागरिकों की नागरिकता रद्द की गयी है, पांच लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी जबकि दो लोगों को सज़ाए मौत सुनाई गयी है।
बहरैनी प्रशासन ने जून 2016 में वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द कर दी जिस पर बहरैन सहित पूरी दुनिया से आपत्ति दर्ज कराई है। बहरैनी शासन ने इसी प्रकार शैख़ ईसा क़ासिम के प्रतिनिधि शैख़ अब्दुल्लाह दक़्क़ाक़ की नागरिकता रद्द कर दी।
बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध जनता के प्रदर्शन जारी हैं। बहरैनी सरकार के विरोधी शांति पूर्ण प्रदर्शन करके देश में स्वतंत्रता, न्याय की स्थापना और भेदभाव को समाप्त करने तथा जनता द्वारा निर्वाचित शासन की स्थापना की मांग कर रहे हैं।
बहरैनी शासन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात सहित कुछ देशों की सहायता से बहरैनी जनता की क्रांति को कुचल रहा है, नागरिक व राजनैतिक कार्यकर्ताओं को सज़ाए मौत दे रहा है या लंबे समय तक उन्हें काल कोठरियों में रख रहा है और उनको नागरिकता से वंचित कर रहा है।
यह बात किसी से ढकी छिपी नहीं है कि बहरैन में शीया आबादी बहुसंख्या में है और इस देश का शासन जनसंख्या के तानेबाने को बदलने के उद्देश्य से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश इत्यादि के शहरियों को देश की नागरिकता प्रदान कर रहा है। जहां यह शासन एक ओर अपने ही नागरिकों की नागरिकता रद्द कर रहा है वहीं दूसरे देशों के निवासियों को धड़ल्ले से नागरिकता प्रदान कर रहा है। (AK)