सऊदी अरब सीरिया में प्रजातंत्र की बात करता है!
तानाशाही व्यवस्था में सबसे अधिक अधिकार सऊदी नरेश के पास होता है और किसी को किसी पद पर रखने या उसे पद से अपदस्थ करने का अधिकार सऊदी नरेश को होता है।
क्षेत्र में सऊदी अरब वह देश है जहां प्रजातंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं है और वहां पर चुनाव का कोई अर्थ नहीं है।
सऊदी अरब को क्षेत्र का एक प्रभावी देश समझा जाता है परंतु सऊदी अरब के बारे में महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि वहां पर न्यूनतम स्तर की भी डेमोक्रेसी नहीं है और वहां की सत्ता में जनता की किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है।
वहां की सत्ता की बागडोर आले सऊद के हाथ में है और वहां की सत्ता आले सऊद की संतान में घुमती रहती है और केवल मृत्यु या विद्रोह की स्थिति में शासक बदलता है।
वहां की तानाशाही व्यवस्था में सबसे अधिक अधिकार सऊदी नरेश के पास होता है और किसी को किसी पद पर रखने या उसे पद से अपदस्थ करने का अधिकार सऊदी नरेश को होता है।
इस प्रकार की व्यवस्था में न केवल मानवाधिकारों की स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है बल्कि न्यूनतम स्तर भी मानवाधिकारों का कोई अर्थ नहीं है। सऊदी अरब में नागरिक अधिकारों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
इसी तरह वहां के संचार माध्यमों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। यही नहीं कुछ दूसरे अरब देशों की भांति सऊदी अरब में दिखावे के भी चुनाव नहीं होते हैं और इस देश में केवल नगर पालिका के चुनाव होते हैं।
सऊदी अरब में नगर पालिका का पहला चुनाव वर्ष 2005 में आयोजित हुआ था और इस चुनाव का दूसरा दौर दो वर्ष के विलंब के साथ वर्ष 2011 में आयोजित हुआ। इन दोनों चुनावों में सऊदी अरब की महिलाओं को न तो उम्मीद बनने का अधिकार था और न ही मत देने का।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2015 में नगर पालिका के लिए होने वाले चुनावों में लगभग एक हज़ार महिलाएं उम्मीदवार बनीं जिसमें से 20 महिलाओं का चयन नगर पालिका के लिए किया गया।
बहरहाल इस प्रकार की स्थिति में संयुक्त राष्ट्रसंघ में सऊदी अरब के राजदूत ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि विश्व के हर देश से सऊदी अरब की लोकप्रियता अधिक है और इसी कारण सऊदी अरब में चुनाव कराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
रोचक बात यह है कि जब सऊदी अरब के राजदूत ने यह दावा उस समय किया जब उनसे यह पूछा गया कि सऊदी अरब में स्वयं प्रजातंत्र नहीं है तो वह किस प्रकार सीरिया में प्रजातंत्र की बात करते हैं। MM